वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का ग्रॉस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) कलेक्शन जुलाई महीने में सालाना आधार पर 15.4% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ (2.11 ट्रिलियन) रुपये पर पहुंच गया है। यह इस वित्त वर्ष के सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शनों में से एक है, जिसमें मजबूत घरेलू लेनदेन और आयात से होने वाले कर संग्रह में आई तेज उछाल का बड़ा योगदान रहा है।
रिफंड को समायोजित करने के बाद, शुद्ध (नेट) जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 15.8% बढ़कर 1.81 लाख करोड़ रुपये हो गया। जुलाई में घरेलू जीएसटी संग्रह 10.1% बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व 28.8% की छलांग लगाकर 66,511 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो स्वस्थ घरेलू मांग और मजबूत आयात गतिविधि को दर्शाता है।
रिफंड और चालू वित्त वर्ष के शुरुआती आंकड़े
जुलाई के दौरान जारी कुल रिफंड 13.1% बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये रहा। वहीं, नेट घरेलू जीएसटी राजस्व 10.5% बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया और आयात से मिलने वाला नेट जीएसटी राजस्व 30.3% चढ़कर 54,223 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
चालू वित्त वर्ष (FY27) के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) की बात करें तो ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 10.1% बढ़कर 8.42 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट जीएसटी राजस्व 9.2% बढ़कर 7.21 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में घरेलू जीएसटी संग्रह 4.5% बढ़कर 5.99 लाख करोड़ रुपये और आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व 26.9% बढ़कर 2.43 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
राज्यों का प्रदर्शन: हरियाणा और गुजरात आगे
प्रमुख राज्यों में, हरियाणा ने जुलाई में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की जहां राजस्व 25% बढ़कर 11,892 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद गुजरात में 19% की वृद्धि के साथ 12,923 करोड़ रुपये और तेलंगाना में भी 19% की बढ़ोतरी के साथ 5,819 करोड़ रुपये संग्रह हुआ।
पंजाब और केरल ने 16% की वृद्धि दर्ज की, जबकि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 15% की तेजी के साथ 9,651 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ। देश के सबसे बड़े जीएसटी योगदानकर्ता राज्य महाराष्ट्र में कलेक्शन 13% बढ़कर 32,210 करोड़ रुपये रहा, जबकि कर्नाटक में 12% की वृद्धि के साथ 13,854 करोड़ रुपये दर्ज किए गए। दिल्ली का जीएसटी संग्रह 8% बढ़कर 6,460 करोड़ रुपये रहा।
दूसरी ओर, जिन राज्यों में कम संग्रह दर्ज किया गया, उनमें हिमाचल प्रदेश में सबसे बड़ी गिरावट (-22%) देखी गई। इसके बाद उत्तराखंड (-18%), पुडुचेरी (-17%), मध्य प्रदेश (-10%), मिजोरम (-7%), आंध्र प्रदेश (-5%) और तमिलनाडु (-1%) का स्थान रहा।