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साइबर ठगी के ₹43 हजार वापस, MRM पोर्टल से मिली राहत; ₹50 हजार तक की होल्ड रकम के लिए ऐसे करें आवेदन

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साइबर ठगी का शिकार होने के बाद लोगों को अक्सर लगता है कि उनके खाते से निकली रकम वापस मिलना मुश्किल है। लेकिन रायपुर के पंडरी निवासी नईम कुरैशी को राहत मिली है। रायपुर पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी में गंवाए गए उनके 43 हजार रुपये MRM पोर्टल के माध्यम से वापस मिले हैं।

इस मामले के बाद पुलिस दूसरे साइबर ठगी पीड़ितों को भी होल्ड की गई रकम वापस पाने की प्रक्रिया की जानकारी दे रही है। खास बात यह है कि पात्र मामलों में 50 हजार रुपये तक की होल्ड रकम वापस पाने के लिए FIR और कोर्ट के आदेश की कॉपी के बिना भी आवेदन करने की सुविधा बताई गई है। हालांकि, रकम लौटाने से पहले संबंधित शिकायत और जरूरी जानकारियों की जांच की जाएगी।

MRM पोर्टल से कैसे वापस मिल सकती है साइबर ठगी की रकम?

अगर साइबर ठगी के बाद आपके पैसे किसी बैंक खाते में होल्ड किए गए हैं, तो MRM पोर्टल के जरिए रिफंड के लिए अनुरोध किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले ठगी की शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।

आवेदन करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:

1. सबसे पहले 1930 पर कॉल करें

साइबर ठगी का पता चलते ही हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और शिकायत दर्ज कराएं। जल्द शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।

2. साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें

आधिकारिक वेबसाइट https://cybercrime.gov.in/ पर जाकर शिकायत दर्ज करें। शिकायत के बाद मिलने वाला 14 अंकों का शिकायत नंबर सुरक्षित रखें।

3. MRM पोर्टल पर जाएं

इसके बाद https://mrm-ncrp.mha.gov.in/ पर जाकर उपलब्ध ‘Raise Refund Request’ विकल्प चुनें।

4. शिकायत नंबर और जरूरी जानकारी भरें

निर्देशों के अनुसार शिकायत नंबर दर्ज करें और OTP के जरिए सत्यापन करें। इसके बाद मांगी गई बैंक संबंधी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज जमा करें।

5. Request ID संभालकर रखें

आवेदन जमा करने के बाद मिलने वाली Request ID को सुरक्षित रखें। इसकी मदद से आवेदन की स्थिति जानने में सुविधा हो सकती है।

क्या ₹50 हजार तक की रकम के लिए FIR और कोर्ट का आदेश जरूरी नहीं?

दी गई जानकारी के अनुसार, पात्र मामलों में 50 हजार रुपये तक की होल्ड रकम की वापसी के लिए FIR और कोर्ट के आदेश की कॉपी के बिना भी आवेदन किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर आवेदन पर रकम अपने आप वापस मिल जाएगी।

आवेदन की जांच, रकम के होल्ड होने की स्थिति और संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रिफंड पर फैसला होगा। इसलिए आवेदन करने से पहले पोर्टल पर दिए गए मौजूदा निर्देश और पात्रता की शर्तें जरूर पढ़ें।

रकम होल्ड होने का क्या मतलब है?

साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद जांच के दौरान संबंधित बैंक खाते में मौजूद रकम को होल्ड किया जा सकता है, ताकि उस पर आगे लेन-देन रोका जा सके। लेकिन रकम का होल्ड होना और उसका पीड़ित को वापस मिलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

रिफंड के लिए संबंधित शिकायत की जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसलिए पीड़ितों को शिकायत नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड और आवेदन से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए।

साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

  • ठगी का पता चलते ही 1930 पर शिकायत करें।
  • आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  • बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, SMS और अन्य सबूत सुरक्षित रखें।
  • MRM पोर्टल पर रिफंड आवेदन की पात्रता जांचें।
  • किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN या बैंकिंग पासवर्ड न बताएं और रिफंड दिलाने के नाम पर पैसे न दें।

निष्कर्ष: नईम कुरैशी को 43 हजार रुपये वापस मिलने का मामला साइबर ठगी पीड़ितों के लिए राहत की खबर है। अगर आपकी रकम भी होल्ड है, तो समय पर शिकायत दर्ज कराकर MRM पोर्टल पर रिफंड की प्रक्रिया जांचें। हालांकि, रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती और अंतिम निर्णय निर्धारित जांच व प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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