बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों में कमी का असर बच्चों से लेकर युवाओं तक की सेहत पर पड़ रहा है। कम उम्र में ब्लड प्रेशर (BP), ब्लड शुगर, पाचन संबंधी परेशानी और कब्ज जैसी समस्याएं चिंता बढ़ा रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव पर नियंत्रण बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नईदुनिया के ‘हेलो डॉक्टर’ कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉ. प्रिया खंडेलवाल ने बदलते मौसम और रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े सवालों के जवाब दिए। उन्होंने मौसमी संक्रमण से बचाव, बुखार में सावधानी, बीपी नियंत्रण और पाचन सुधारने के लिए जरूरी सलाह दी।
बदलते मौसम में वायरल बुखार और सर्दी-खांसी से कैसे बचें?
तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी संक्रमणों के मामले बढ़ सकते हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, अच्छी नींद लेना और साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है।
बचाव के लिए जरूरी बातें:
- पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिएं।
- घर का ताजा और संतुलित भोजन करें।
- नींद पूरी करें और आराम को प्राथमिकता दें।
- बाहर का अस्वच्छ भोजन खाने से बचें।
- बुखार या अन्य लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से परामर्श लें।
बुखार होने पर पैरासिटामोल लेना कितना सुरक्षित?
बुखार में पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी सही खुराक उम्र, वजन, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य दवाओं पर निर्भर करती है। केवल वजन के आधार पर दवा की खुराक तय करना उचित नहीं है।
बुखार लगातार बना रहे, हालत बिगड़े या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। बच्चों को दवा देने से पहले डॉक्टर से खुराक की पुष्टि करें। बिना सलाह के कई ऐसी दवाएं एक साथ न लें जिनमें पैरासिटामोल मौजूद हो।
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?
बीपी को नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ स्वस्थ दिनचर्या भी महत्वपूर्ण है। उच्च रक्तचाप कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी बना रह सकता है, इसलिए समय-समय पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
बीपी नियंत्रण के लिए अपनाएं ये आदतें:
- रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलें या व्यायाम करें।
- पर्याप्त और नियमित नींद लें।
- तनाव कम करने के लिए ध्यान या अन्य आरामदायक गतिविधियां अपनाएं।
- नमक का सेवन सीमित रखें और संतुलित आहार लें।
- डॉक्टर की सलाह से निर्धारित दवाएं नियमित रूप से लें।
सुबह जल्दी उठकर टहलना उपयोगी हो सकता है, लेकिन सबसे जरूरी नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आराम है। बीपी की दवा अपने आप बंद न करें।
पाचन और कब्ज की समस्या से कैसे मिलेगी राहत?
अनियमित खान-पान, कम फाइबर वाला भोजन, पर्याप्त पानी न पीना और शारीरिक गतिविधि की कमी कब्ज की समस्या में योगदान दे सकते हैं। पाचन बेहतर रखने के लिए भोजन की गुणवत्ता और दिनचर्या दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
पाचन सुधारने के उपाय:
- भोजन में साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां शामिल करें।
- मैदे और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- नियमित रूप से व्यायाम या पैदल चलने की आदत डालें।
- भोजन का समय नियमित रखें और पर्याप्त नींद लें।
छाछ और आंवला संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का निश्चित इलाज या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
बच्चों और युवाओं में BP, शुगर और पाचन की परेशानी क्यों बढ़ रही है?
कम शारीरिक गतिविधि, अधिक स्क्रीन टाइम, असंतुलित भोजन और नींद की कमी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। मीठे पेय पदार्थों और अतिरिक्त चीनी का अधिक सेवन भी वजन बढ़ने तथा टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम में योगदान दे सकता है।
चीनी की जगह गुड़ या शहद लेने से समस्या अपने आप खत्म नहीं होती, क्योंकि दोनों में भी शर्करा और कैलोरी होती हैं। इसलिए इनका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए।
बच्चों और युवाओं की दिनचर्या में खेलकूद, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद को जगह देना जरूरी है। यदि कम उम्र में बीपी या ब्लड शुगर की समस्या के संकेत मिलें, तो जांच और चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
सेहत के लिए जरूरी है संतुलित दिनचर्या
स्वस्थ रहने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ को छोड़ना या किसी घरेलू उपाय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद हैं। बच्चों और युवाओं में लगातार कब्ज, असामान्य प्यास, बार-बार पेशाब या बीपी संबंधी समस्या दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।