गलवान की झड़प के बाद पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ भारत पहुंच चुके हैं। वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं।
हालांकि इससे अलग शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली उनकी वार्ता बेहद मायने रखती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पूरी तैयारी के साथ भारत आए हैं। उनके साथ कम से कम 400 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल है। वह अपने साथ चीन के नंबर दो नेता काई की को भी साथ लाए हैं। उन्हें शी जिनपिंग का दाहिना हाथ कहा जाता है। इसके अलावा चीन के विदेश मंत्री वांग यी जिनपिंग के साथ मौजूद हैं।
क्या हैं शी जिनपिंग के इस यात्रा के मायने
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह यात्रा बेहद अहम इसलिए मानी जा रही है क्योंकि सात साल के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए थे। इसके बाद शी जिनपिंग ने भी ब्रिक्स में आने की तैयारी कर ली। गलवान की झड़प के बाद जिस कदर संबंध बिगड़ गए थे, इस यात्रा से उनके सुधरने की उम्मीद नजर आ रही है।
कौन हैं की काई
शी जिनपिंग और की काई कई दशकों से साथ हैं। 1996 में शी को फुजियान का सेक्रेटरी बनाया गया था। तब ही की काई को उनके सहयोग के लिए नियुक्त किया गयाथा। बाद में की काई बीजिंग के मेयर भी रहे। 2022 में वह सीपीसी सेक्रेटेरिएट के फर्स्ट सेक्रेटरी बने। इसके बाद 2023 में जनरल ऑफिस का निदेशक बना दिया गया। वैसे तो चीन में आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री ली च्यांग को नंबर दो माना जाता है। लेकिन फैसलों के लिहाज से की काई की बहुत अहमियत है।
भारत के इस दौरे में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। चीन के साथ भारत के सीमा के साथ ही निवेश और व्यापार को लेकर भी विवाद हैं। ऐसे में इस यात्रा में कई मुद्दों का हल निकालने का प्रयास किया जा सकता है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच सीधी वार्ता होगी। ऐसे में एलएसी को लेकर भी बात हो सकती है।
शी इससे पहले 2019 में भारत यात्रा पर आए थे। हालांकिशी और पीएम मोदी के बीच वर्ष 2024 के बाद से कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में मुलाकात हो चुकी है। पिछले वर्ष चीन के तियांजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई थी। दोनों नेता अभी कुछ दिन पहले किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में भी एससीओ के शिखर सम्मेलन के दौरान भी मिले थे। मोदी और शी की बातचीत के आधार पर सीमा विवादों के समाधान के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच दो- तीन दौर की बातचीत हो चुकी है। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बहाली और परस्पर संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अनेक कदम उठाये हैं।