मध्यावधि चुनाव में संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सूजी वाइल्स का इस्तीफा स्वीकार करते हुए अपने सबसे कट्टर और पुराने रणनीतिकार स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ बना दिया है।
चुनावी हार के बाद नीति बदलने के बजाय ट्रम्प ने मिलर को आगे लाकर यह साफ संकेत दिया है कि वे आने वाले दो वर्षों में विपक्षी डेमोक्रेट्स के सामने झुकने के बजाय अपने आक्रामक एजेंडे पर ही अडिग रहेंगे।
सख्त आव्रजन नीतियों के मुख्य रणनीतिकार: 2016 से ट्रम्प के सबसे भरोसेमंद चेहरे
स्टीफन मिलर को अमेरिकी राजनीति में ट्रम्प के सबसे प्रभावशाली और वैचारिक रूप से बेहद करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। साल 2016 के पहले राष्ट्रपति चुनाव अभियान में वे ट्रम्प के भाषण लेखक के तौर पर जुड़े थे।
इसके बाद वे प्रशासन की सबसे सख्त आव्रजन नीतियों के मुख्य रणनीतिकार बनकर उभरे। अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रीन कार्ड नियमों को कड़ा करने के पीछे मिलर का ही दिमाग रहा है। ट्रम्प के ‘अमेरिका फर्स्ट’ नारे के पक्के पैरोकार मिलर मानते हैं कि सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय हित सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
सूजी वाइल्स से बिल्कुल अलग कार्यशैली: पर्दे के पीछे काम करने की जगह आक्रामक अंदाज
सूजी वाइल्स को ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने वाली अधिकारी के रूप में जाना जाता था। वे मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर शांति से संगठनात्मक काम करना पसंद करती थीं और ट्रम्प के सबसे अनुशासित 2024 चुनाव अभियान की सफलता का श्रेय उन्हीं को दिया गया था।
वहीं इसके उलट, स्टीफन मिलर सार्वजनिक मंचों और मीडिया में ट्रम्प की नीतियों का बेहद मुखर और आक्रामक तरीके से बचाव करने के लिए जाने जाते हैं। गुरुवार रात वाइल्स ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया, जिसके बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर उनके योगदान की तारीफ करते हुए उन्हें अपने राजनीतिक संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की बात कही।
मध्यावधि चुनाव में आव्रजन नीति पर उठा था सवाल: फिर भी मिलर पर ही जताया भरोसा
हालिया मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए जिन वजहों की चर्चा हो रही है, उनमें मिलर की सख्त आव्रजन नीतियां भी प्रमुख थीं। एसोसिएटेड प्रेस के वोटर पोल के मुताबिक, 10 में से करीब 6 मतदाताओं का मानना था कि ट्रम्प प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई जरूरत से ज्यादा सख्त रही है।
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने मिलर की नियुक्ति की तुरंत आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी जनता ने जिन नीतियों को खारिज किया, ट्रम्प उन्हीं को और आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ने चुनावी हार के बावजूद अपनी नीतियों पर पीछे हटने के बजाय मिलर को सबसे ताकतवर पद सौंपकर अपनी प्राथमिकताओं को फिर दोहराया है।
व्हाइट हाउस में ट्रम्प के आखिरी 2 साल: आदेशों और शक्तियों से टकराएंगे मिलर
चीफ ऑफ स्टाफ का पद व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के बाद सबसे अहम माना जाता है, जो प्रशासनिक प्राथमिकताओं, नियुक्तियों और नीतिगत फैसलों के बीच तालमेल बैठाता है। संसद में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाने से ट्रम्प को अपने बचे हुए दो साल के कार्यकाल में भारी विधायी विरोध का सामना करना पड़ेगा।
ऐसी स्थिति में कानून पास कराने के बजाय राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों और प्रशासनिक आदेशों के जरिए फैसले लागू कराने की योजना है। मिलर को संघीय सरकार के नियमों और राष्ट्रपति की शक्तियों की गहरी समझ है, जिससे वे आने वाले दिनों में डेमोक्रेट्स की चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकेंगे।