दुर्ग, 14 अक्टूबर 2026/ न्यायालय से किसी आदेश या निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करना पक्षकारों और अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में दुर्ग न्यायालय में ई-टिकट जनरेशन एवं ई-प्रमाणित प्रतिलिपि (ई-सर्टिफाइड कॉपी) विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर की ई-कमेटी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को नई तकनीकी प्रक्रिया से परिचित कराना नहीं, बल्कि न्यायालयीन सेवाओं को इस तरह विकसित करना था कि तकनीक का लाभ अंततः आम नागरिक, पक्षकार और अधिवक्ता तक पहुँचे।
कागजी प्रक्रिया से डिजिटल सुविधा की ओर
कार्यशाला में ई-टिकट तैयार करने की प्रक्रिया, ऑनलाइन सत्यापन तथा प्रमाणित प्रतिलिपि से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उच्च न्यायालय के तकनीकी विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए यह समझाया कि डिजिटल प्रणाली का प्रभावी उपयोग न्यायालयीन कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को सुगम करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है। प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि कर्मचारियों को केवल प्रक्रिया की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनके व्यावहारिक प्रश्नों और कार्य के दौरान सामने आने वाली तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
एक सभागार से कई न्यायालयों तक पहुँचा प्रशिक्षण
जिला न्यायालय दुर्ग परिसर स्थित सभागार से जिला न्यायालय एवं कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के प्रतिलिपि अनुभाग के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ सहित कुल 15 प्रतिभागियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहीं, पाटन, भिलाई-3 एवं धमधा स्थित बाह्य तालुका न्यायालयों के संबंधित कर्मचारी भी अपने-अपने न्यायालय परिसरों से ऑनलाइन जुड़े। इस व्यवस्था ने प्रशिक्षण को एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग न्यायालयों के कर्मचारियों को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ने का अवसर दिया। इससे तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिली।
तकनीक का वास्तविक उद्देश्य नागरिक को सुविधा
प्रशिक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (कम्प्यूटरीकरण) / सी.पी.सी. की उपस्थिति में तकनीकी विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया। इससे प्रतिभागियों को ई-टिकट जनरेशन और ई-प्रमाणित प्रतिलिपि से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्टता से समझने का अवसर मिला। डिजिटल न्याय व्यवस्था की सफलता केवल नई तकनीक अपनाने में नहीं, बल्कि उसके माध्यम से नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने में निहित है। इस दृष्टि से ऐसे प्रशिक्षण न्यायालयीन कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।