रायपुर सहित प्रदेश के कई स्पा सेंटरों में बिना उचित निगरानी के डीप मसाज के नाम पर अनैतिक गतिविधियां चल रही हैं। इन स्पा सेंटरों के संचालक अपने ग्राहकों को सेक्स सर्विस देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम के हाथ कुछ चैट्स लगी हैं, जो इस गंदे काम को उजागर करती हैं। पहले 10 दिसंबर को इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें लाइसेंस और नियमों में लापरवाही का उल्लेख किया गया था। अब इस पार्ट-2 में बताया जा रहा है कि स्पा सेंटर संचालक किस तरह अपने ग्राहकों को जाल में फंसाकर गंदे काम में शामिल कर रहे हैं।
रायपुर के कुछ स्पा संचालक ग्राहकों को सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर मसाज सर्विस का ऑफर देते हैं। जब ग्राहक जवाब नहीं देते, तो वे दोबारा संपर्क करते हैं। इसके बाद चैट में यह बात खुलकर सामने आती है कि मसाज के अलावा और भी सर्विस उपलब्ध है। एक बार ग्राहक ने अग्रिम भुगतान किया, तो अपॉइंटमेंट बुक करने का प्रस्ताव भी दिया जाता है। इस प्रकार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर स्पा संचालक अपने ग्राहकों से गंदे तरीके से डील कर रहे हैं।
सिर्फ स्पा सेंटर ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन देह व्यापार का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। वेबसाइट्स पर लड़कियों की तस्वीरों के साथ उनकी सर्विस और रेट भी प्रकाशित किए जा रहे हैं। पुलिस विभाग इस मामले में सोशल मीडिया की निगरानी की बात करता है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। होटल संचालक भी इस गंदे काम में शामिल हैं, जो बिना आईडी के युवतियों और उनके ग्राहकों को कमरे उपलब्ध करवा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से होटल के अंदर कई दरवाजे रखे जाते हैं, ताकि पुलिस के छापे के दौरान आरोपी फरार हो सकें।
राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों की युवतियां भी इस धंधे में शामिल हैं। दलाल इन युवतियों से संपर्क कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, और उन्हें मोटी रकम, वाहन, और टिकट जैसे प्रलोभन दिए जाते हैं। रायपुर पुलिस ने कई बार छापे मारे हैं और दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कोलकाता, भोपाल और अन्य राज्यों की युवतियों को पकड़ा है।
इसके अतिरिक्त, रायपुर में लगभग 400 स्पा सेंटर हैं, जिनमें करीब 3,000 युवक-युवतियां काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश सेंटरों में ना तो रिकॉर्ड रखा जाता है, ना ही CCTV कैमरे लगाए गए हैं, और ना ही विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है। इसके कारण यह पता नहीं चल पाता कि इन सेंटरों में क्या गतिविधियां हो रही हैं, और इनमें किस तरह के लोग आ रहे हैं। निगम और पुलिस प्रशासन के पास इन सेंटरों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।