छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के 6 सिटिंग पार्षदों ने टिकट न मिलने पर बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा एक दर्जन से ज्यादा कांग्रेस नेताओं ने भी पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है। बगावत करने वाले मौजूदा पार्षदों में हरदीप सिंह बंटी होरा, समीर अख्तर, आकाश तिवारी, आकाशदीप शर्मा और रितेश त्रिपाठी शामिल हैं। इसके अलावा 3 पूर्व पार्षद और MIC सदस्य विमल गुप्ता, जसबीर सिंह ढिल्लन और अनिता फूटान ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है।
जितेंद्र अग्रवाल पिछले चुनाव में निर्दलीय पार्षद थे। जिन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली थी। लेकिन इस बार उन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। इसलिए इस बार भी अग्रवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
इन नेताओं के बागी तेवर
इसी तरह कांग्रेस नेता जितेन्द्र बारले, देवव्रत श्रीवास, अनीस निजामी, वहीदुद्दीन, केशव सिन्हा, ज्योति देवांगन, भीम यादव और अमित कुमार यादव ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है।
प्रदेश महिला कांग्रेस की सचिव पूनम पाण्डे ने भी बगावत कर निर्दलीय नामांकन भरा है, जबकि जिला जीत सिंह ने यतियतन लाल वार्ड से खुद पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद अपनी पत्नी गायत्री सिंह को महापौर पद पर खड़ा किया है।
बगावत की वजह, टिकट वितरण को लेकर नाराजगी
कई पार्षदों और नेताओं ने टिकट वितरण में भाई-भतीजावाद और धन लेन-देन के आरोप लगाए हैं। जानिए किसने क्या कहा।
- समीर अख्तर (शहीद राजीव पांडेय वार्ड): “परफॉर्मेंस के आधार पर टिकट मिलनी चाहिए, लेकिन यहां पैर छूने और पैर दबाने वालों को प्राथमिकता दी गई।”
- हरदीप सिंह बंटी होरा (शहीद हेमू कल्याणी वार्ड): “युवा और जीतने वाले पार्षदों की अनदेखी कर अपने करीबियों को टिकट दिया गया। कांग्रेस मेरा-तेरा करने वाली पार्टी बन गई है।”
- विमल गुप्ता (इंदिरा गांधी वार्ड): “रात भर लिस्ट का इंतजार करते रहे, जो सुबह जारी हुई। मेरा नाम लिस्ट में नहीं था वार्ड के लोगों ने चुनाव लड़ने कहा इसलिए निर्दलीय नामांकन जमा कर रहा हूं” जितेन्द्र बारले ने पार्टी के नेताओं पर जातिवाद का आरोप लगाया है।
जातिवादी बयान का विरोध
कांग्रेस नेता जितेंद्र बारले ने आरोप लगाया कि टिकट चयन समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने कहा कि, “क्या नाली साफ करने वाला लड़का पार्षद पद का दावेदार होगा?” उन्होंने शर्मा के इस बयान को जातिवादी और अपमानजनक बताया गया।
उन्होंने कहा कि आखिरी समय तक मेरा नाम पैनल में शामिल था, लेकिन टिकट नहीं दी गई। मैं पार्टी में जातिवाद और पूंजीवाद के खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूं।
बाहरी नेताओं को टिकट
यतियतन लाल वार्ड से जिला जीत सिंह ने कहा कि, “कई सालों से पार्टी के लिए मेहनत की, लेकिन 1 साल पहले बीजेपी से आए व्यक्ति को टिकट दे दिया गया।” नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया, जबकि उनकी पत्नी गायत्री सिंह ने महापौर पद के लिए पर्चा भरा।
देर रात तक जारी रहा असमंजस
नामांकन की आखिरी तारीख से पहले कांग्रेस ने पार्षदों की सूची जारी करने में काफी देरी की। रायपुर में देर रात तक कार्यकर्ता राजीव भवन में टिकट का इंतजार करते रहे। विरोध और हंगामे के डर से पार्टी ने सूची को गोपनीय रखा।
कई प्रत्याशियों को फोन पर टिकट की जानकारी दी गई। सुबह 3:00 बजे कांग्रेस पार्षदों की लिस्ट मीडिया ग्रुप्स में वायरल हुई। हालांकि, इसमें रायपुर के 70 वार्डों में से केवल 66 वार्डों के ही नाम थे। जबकि सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर आधिकारिक मीडिया ग्रुप में भेजा गया।
कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
कांग्रेस को इन बगावतों से निकाय चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। बागी नेताओं के चुनाव लड़ने से कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। पार्टी को जल्द ही इन आंतरिक मतभेदों को सुलझाने की जरूरत है।