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जरूरत की खबर- इंश्योरेंस के नाम पर करोड़ों की ठगी:फ्रॉड कंपनी और एजेंट के जाल में न फंसे, पॉलिसी लेते हुए ये बातें ध्यान रखें

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महाराष्ट्र के पुणे में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां 61 वर्षीय एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर से इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 2.22 करोड़ रुपए की ठगी हो गई। यह ठगी एक या दो दिन नहीं, बल्कि कई महीनों तक चली। ठगों ने पहले खुद को सरकारी अधिकारी बताया और बाद में हाई मैच्योरिटी बेनिफिट्स का लालच देकर पीड़िता को कई पॉलिसी खरीदने के लिए मजबूर किया।

आज के दौर में फाइनेंशियल सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस काफी जरूरी हो गया है। इंश्योरेंस के जरिए लोग छोटी-छोटी बचत करके एक बड़ा अमाउंट इकट्ठा करना चाहते हैं।

हालांकि आज मार्केट में दर्जनों इंश्योरेंस कंपनियां मौजूद हैं। इस वजह से यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी इंश्योरेंस कंपनी या पॉलिसी सही है। इसमें जरा सी लापरवाही बरतने पर लोग इंश्योरेंस स्कैम का शिकार हो सकते हैं।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि इंश्योरेंस स्कैम क्या है? साथ ही जानेंगे कि-

  • इंश्योरेंस पॉलिसी स्कैम की पहचान कैसे करें?
  • इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट: पवन दुग्गल, साइबर एक्सपर्ट, नई दिल्ली

सवाल- इंश्योरेंस स्कैम क्या है? जवाब- यह स्कैम फेक इंश्योरेंस कंपनी, एजेंट्स या बिचौलियों द्वारा किया जाता है। पहले स्कैमर मार्केट रेट से कई गुना अधिक रिटर्न का लालच देते हैं। इसलिए लोग उनके झांसे में फंस जाते हैं और इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेते हैं। इस स्कैम को इतनी सफाई से अंजाम दिया जाता है कि लंबे समय तक लोगों को स्कैम की भनक तक नहीं लगती है। वे लगातार अपने इंश्योरेंस की किस्त भरते रहते हैं। स्कैम का पता तब चलता है, जब रिटर्न का समय पूरा हो जाता है।

सवाल- पुणे की रिटायर्ड बैंक मैनेजर इस इंश्योरेंस स्कैम का कैसे शिकार हुईं? जवाब- यह स्कैम 2023 के अंत में शुरू हुआ था और कई महीनों तक चला। स्कैमर्स ने पहले पीड़ित महिला से संपर्क किया और खुद को बड़े सरकारी संगठन जैसे भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) का प्रतिनिधि बताया। स्कैमर्स ने पीड़िता को इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में जानकारी दी और कई ऑफर्स भी दिए। पीड़िता स्कैमर्स के झांसे में आ गई और उन्होंने कई इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लीं। इसके बाद स्कैमर्स ने GST, TDS, प्रोसेसिंग फीस और वेरिफिकेशन चार्ज के नाम पर पीड़िता से कई पेंमेंट कराए।

इस फ्रॉड को अंजाम देने के लिए स्कैमर्स ने 19 अलग-अलग आइडेंटिटी का इस्तेमाल किया। इस बीच जब पीड़िता को इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर कोई शक होता तो स्कैमर्स पैसा डूबने और भारी नुकसान होने की चेतावनी देते। इस तरह पीड़िता ने इंश्योरेंस कंपनी के अकाउंट का दावा करने वाले कई फेक बैंक अकाउंट्स में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर की और नकद पेमेंट भी किया।

सवाल- इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर किस तरह के फ्रॉड होते हैं? जवाब- जालसाज लोगों को ठगने के लिए फोन या ईमेल के जरिए ऑनलाइन फेक पॉलिसी बेचते हैं। वहीं कभी इंश्योरेंस एजेंट कवरेज, बेनिफिट और प्रीमियम के बारे में गलत जानकारी देकर लोगों को पॉलिसी बेचते हैं। ऐसी पॉलिसी का समय पूरा होने के बाद पॉलिसीधारक को कोई लाभ नहीं मिलता है।

इसके अलावा कुछ इंश्योरेंस एजेंट्स ग्राहकों से प्रीमियम तो कलेक्ट कर लेते हैं, लेकिन कंपनी के पास जमा नहीं कराते हैं। इस तरह के फ्रॉड के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं। इंश्योरेंस फ्रॉड से जुड़े कुछ अन्य तरीके भी हैं। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- इंश्योरेंस से जुड़ी धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं? जवाब- किसी भी प्रकार का इंश्योरेंस लेने से पहले सजग रहने की जरूरत है। अगर आप ऑनलाइन पॉलिसी खरीद रहे हैं तो उसकी टर्म्स और कंडीशंस को ध्यान से पढ़ें। वहीं एजेंट या ब्रोकर से इंश्योरेंस खरीदने से पहले उनकी विश्वसनीयता चेक करें। अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स या ईमेल पर भरोसा बिल्कुल न करें। कोई भी इंश्योरेंस कंपनी फोन या ईमेल करके बैंक डिटेल्स नहीं मांगती है। हमेशा इंश्योरेंस के लिए कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या अधिकृत शाखा से संपर्क करें। यह इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

सवाल- इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- नीचे दिए पॉइंट्स से समझिए कि इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स को खुद वेरिफाई करेें।
  • किसी भी एजेंट पर पूरी तरह से निर्भर न रहें।
  • इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से पहले कंपनी के बारे में रिसर्च करें।
  • भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) से मान्यता प्राप्त इंश्योरेंस कंपनी पर ही भरोसा करें।
  • कंपनी की वित्तीय स्थिति और क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR) जरूर देखें।
  • हाई रेशियो वाली कंपनी पर भरोसा करना ही बेहतर है।
  • कंपनी के ऑनलाइन रिव्यू पढ़ें और सुनिश्चित करें कि कंपनी की सेवा अच्छी हो।
  • किसी भी डॉक्यूमेंट पर साइन करने से पहले उसकी शर्तें और नियमों को ध्यान से पढ़ें। यह जरूर देखें कि कोई हिडेन चार्ज या कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं है।
  • पॉलिसी खरीदने से पहले परिवार या फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह लें।
  • खरीदारी के बाद पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स और रसीद संभालकर रखें।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखें और सही इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें, ताकि भविष्य में कोई समस्या न हो।

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