पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर विवाद: उमर अब्दुल्ला ने जयशंकर के बयान पर क्या कहा?
भारत और पाकिस्तान के बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का मुद्दा एक लंबे समय से चर्चा में रहा है। हाल ही में, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बयान दिया, जिस पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
जयशंकर ने कहा था कि PoK भारत का हिस्सा है और इसे वापस लेना हमारा अधिकार है। इस बयान पर उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि अगर PoK को वापस लेने से कोई रोक नहीं रहा है, तो अब तक इसे हासिल क्यों नहीं किया गया?
उमर अब्दुल्ला का सवाल
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार को कोई रोक-टोक नहीं है, तो अब तक PoK को भारत में शामिल क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बयान देने की बजाय व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए।
जयशंकर का बयान और सरकार का रुख
डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि PoK पर भारत का वैध अधिकार है और इसे वापस लेने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा कि PoK पर बात करना कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह भारत के संप्रभु अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी अन्य देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
PoK विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ
- 1947-48: भारत-पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध हुआ, जिसके बाद पाकिस्तान ने PoK पर कब्जा कर लिया।
- 1971: बांग्लादेश युद्ध के दौरान पाकिस्तान को भारी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन PoK का मुद्दा ज्यों का त्यों बना रहा।
- 1999: कारगिल युद्ध के समय भी PoK विवाद उभर कर सामने आया।
- 2019: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, जिससे केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि PoK भी भारत का अभिन्न हिस्सा है।
सरकार की रणनीति और उमर अब्दुल्ला की आलोचना
भारत सरकार का कहना है कि PoK को वापस लेने के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन उमर अब्दुल्ला जैसे विपक्षी नेता सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार को कोई बाधा नहीं है, तो अब तक PoK को भारत में शामिल क्यों नहीं किया गया?
PoK को लेकर भारत का भविष्य का कदम
- कूटनीतिक प्रयास: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत PoK के मुद्दे को लगातार उठाता रहा है।
- सैन्य रणनीति: भारतीय सेना की ताकत को बढ़ाया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी स्थिति का सामना किया जा सके।
- राजनीतिक बयानबाजी: भारत सरकार लगातार यह दोहराती रही है कि PoK को भारत में शामिल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
PoK का मुद्दा भारत की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों दोनों से जुड़ा हुआ है। जहां केंद्र सरकार इसे भारत का हिस्सा मानती है और इसे वापस लेने के लिए प्रयासरत है, वहीं उमर अब्दुल्ला जैसे नेता सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत सरकार PoK पर क्या कदम उठाती है और क्या सच में इसे भारत में शामिल करने की दिशा में कोई ठोस पहल होती है या नहीं।