भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कुछ महीने से तल्खी बढ़ गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और कुछ कट्टरपंथियों की रिहाई को लेकर जताई गई चिंता पर ढाका ने कड़ा एतराज जताया है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत की टिप्पणी को अनुचित और आंतरिक मामलों में दखल बताया है।
भारत की चिंता पर क्या बोला बांग्लादेश
पिछले हफ्ते भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर बयान दिया था।
उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश सरकार को इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही, उन्होंने कुछ कट्टरपंथी तत्वों की जेल से रिहाई पर भी सवाल उठाते हुए इसे लेकर भारत की चिंता जताई थी।
इस बयान पर बांग्लादेश सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद रफीकुल आलम भड़क गए।
उन्होंने इसे बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करार देते हुए कहा, “हमारी सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सक्षम है और हमें किसी बाहरी देश से सलाह लेने की जरूरत नहीं। भारत को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जो हमारे आपसी रिश्तों में खटास ला सकते हैं।”
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका देश हर राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और भारत से भी वही उम्मीद रखता है।
बयान में आगे कहा गया कि, “ढाका भारत के साथ आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर मजबूत रिश्ते बनाए रखना चाहता है, लेकिन अगर भारत इस तरह के बयान देना जारी रखता है, तो यह रिश्तों के लिए सही नहीं होगा।”