मुख्य बिंदु:
- छत्तीसगढ़ सरकार का नया आबकारी नियम लागू
- घर में पार्टी के लिए 10 हजार, शादी-ब्याह के लिए 15 हजार और बड़े इवेंट्स के लिए 30 हजार का लाइसेंस अनिवार्य
- आबकारी विभाग ने 12,700 करोड़ रुपए राजस्व का लक्ष्य रखा
- राज्य में 67 नई शराब दुकानें और 67 नए शराब ब्रांड उपलब्ध होंगे
निजी पार्टी में शराब परोसने के लिए अब लाइसेंस जरूरी
छत्तीसगढ़ में अब घर पर पार्टी में शराब परोसने के लिए भी सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया है। सरकार ने एक नए आबकारी नियम के तहत अलग-अलग आयोजनों के लिए लाइसेंस फीस तय की है।
अगर कोई व्यक्ति अपने घर (फार्म हाउस को छोड़कर) में पार्टी आयोजित करता है और उसमें शराब परोसना चाहता है, तो उसे 10 हजार रुपए का लाइसेंस लेना होगा। इसी तरह, यदि यह शादी-ब्याह का आयोजन है, तो लाइसेंस फीस 15 हजार रुपए होगी। बड़े इवेंट्स, कंसर्ट्स, डांस प्रोग्राम, लाइव म्यूजिक शो, क्रिकेट मैच और नववर्ष समारोह जैसे आयोजनों के लिए 30 हजार रुपए का लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
एक दिन के लिए अलग-अलग शुल्क तय
नए नियम के तहत, शराब परोसने के लिए जो लाइसेंस जारी किए जाएंगे, उन्हें एफएल 5 क और एफएल 3 श्रेणी में रखा गया है।
- निजी भवन (फार्म हाउस को छोड़कर) में शराब परोसने के लिए – 10,000 रुपए
- होटल, रेस्टोरेंट, शादी हॉल, फार्म हाउस में कार्यक्रम के लिए – 15,000 रुपए
- इवेंट्स, कंसर्ट, लाइव म्यूजिक, डांस शो, क्रिकेट मैच या नववर्ष समारोह के लिए – 30,000 रुपए
शराब से राजस्व में वृद्धि का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शराब बिक्री से 12,700 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।
- पिछले साल का लक्ष्य 11,000 करोड़ रुपए था, लेकिन सरकार ने इसमें बढ़ोतरी कर इसे 12,700 करोड़ कर दिया है।
- पिछले साल सरकार ने 10,120 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था।
नई शराब दुकानें और ब्रांड्स
आबकारी विभाग ने राज्य में 67 नई शराब दुकानें खोलने की योजना बनाई है। साथ ही, 67 नए शराब ब्रांड और 8 नए बीयर ब्रांड राज्य की दुकानों में उपलब्ध कराए जाएंगे।
नए नियमों से क्या होगा असर?
- निजी पार्टियों में अवैध शराब परोसने पर रोक लगेगी।
- सरकार को शराब बिक्री से अधिक राजस्व मिलेगा।
- बड़े आयोजनों के लिए नियंत्रण और लाइसेंस प्रणाली लागू होगी।
- शराब के नए ब्रांड्स उपलब्ध होने से बाजार में विविधता बढ़ेगी।
जनता की प्रतिक्रिया
जहां कुछ लोग इस नए नियम को आवश्यक नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने का अच्छा कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे अनावश्यक करार दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि इससे आयोजन महंगे हो जाएंगे और लोग बिना लाइसेंस के शराब परोसने के विकल्प तलाश सकते हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का यह नया आबकारी नियम शराब बिक्री से राजस्व बढ़ाने और अवैध शराब परोसने पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। अब देखना यह होगा कि इस नियम से कितनी पारदर्शिता आती है और लोग इसे कैसे स्वीकार करते हैं।