विस्तृत समाचार: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खनिज निधि (माइनिंग फंड) के दुरुपयोग को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत पर केंद्र सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। इस मामले की जांच के लिए बिलासपुर संभाग के आयुक्त को निर्देश दिया गया है।
ननकीराम कंवर की शिकायत पर केंद्र की प्रतिक्रिया
पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि के कथित दुरुपयोग की शिकायत की थी। इस शिकायत के आधार पर केंद्र सरकार ने निर्देश जारी कर मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। साथ ही, जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट कार्यालय को सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है माइनिंग फंड घोटाले का मामला?
खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) का गठन इस उद्देश्य से किया गया था कि इसका उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के लोगों की भलाई के लिए किया जाए। लेकिन, आरोप है कि इस निधि का सही ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है और इसमें अनियमितताएं हो रही हैं। ननकीराम कंवर ने इसी मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने धनराशि के दुरुपयोग की जांच की मांग की थी।
कौन करेगा जांच?
इस पूरे मामले की जांच के लिए भौमिकी और खनिकर्म विभाग ने बिलासपुर संभाग के आयुक्त को आदेश दिया है। अब संभागायुक्त को जांच कर यह पता लगाना होगा कि क्या वास्तव में धन का गलत तरीके से उपयोग हुआ है या नहीं। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित कार्यालय को सौंपनी होगी।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र की मुख्य बातें
- डीएमएफ फंड के दुरुपयोग की शिकायत – ननकीराम कंवर ने अपनी शिकायत में कहा कि यह फंड खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाया गया था, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो रहा है।
- निष्पक्ष जांच की मांग – पूर्व मंत्री ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी, ताकि यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- अन्य सरकारी अधिकारियों को भी भेजी गई पत्र की प्रतिलिपि – इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय खान मंत्रालय, भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग को भी भेजी गई थी।
खनिज न्यास निधि (DMF) क्या है?
जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एक सरकारी योजना है, जिसके तहत खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए फंड का इस्तेमाल किया जाता है। यह निधि उन जिलों में खर्च की जाती है, जहां खनन कार्यों के कारण पर्यावरण और स्थानीय लोगों पर असर पड़ता है। इस फंड का उपयोग मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए।
क्या हो सकते हैं अगले कदम?
- संभागायुक्त द्वारा विस्तृत जांच – बिलासपुर संभाग के आयुक्त अब इस मामले की पूरी जांच करेंगे और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करेंगे।
- रिपोर्ट पेश की जाएगी – जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट संबंधित कार्यालय को सौंपी जाएगी।
- संभावित कार्रवाई – यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
निष्कर्ष
खनिज निधि का सही उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो इसकी जांच जरूरी है, ताकि दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके और इस फंड का सही उपयोग किया जा सके। ननकीराम कंवर की शिकायत पर केंद्र द्वारा उठाया गया यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।