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रायपुर: राज्यपाल रमेन डेका ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में किया पौधारोपण, भावनात्मक जुड़ाव से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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कोरबा/रायपुर।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कोरबा जिले के जिला पंचायत परिसर में एक अनूठे अभियान — “एक पेड़ माँ के नाम” के अंतर्गत बादाम के पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि

“हर पेड़, हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर है — और जब ये पेड़ मां के नाम लगाए जाएं, तो उनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।”



पेड़ सिर्फ पौधा नहीं, मां के आशीर्वाद जैसा है: राज्यपाल डेका

राज्यपाल ने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव और संवेदनशीलता की जागृति का एक माध्यम है।

“मां हमारी पहली शिक्षक होती हैं, और अगर हम उनके नाम एक पेड़ लगाएं तो यह न केवल पर्यावरण की सेवा है, बल्कि मां के प्रति श्रद्धा का भी अनूठा उदाहरण है।”

राज्यपाल ने यह भी कहा कि पौधा लगाना पर्याप्त नहीं, उसे जीवित और सुरक्षित बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए।


पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी जरूरी

अपने संदेश में राज्यपाल डेका ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास, जैसे पेड़ लगाना, अत्यंत प्रभावशाली साबित हो सकते हैं।

उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि:

  • वर्ष में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं

  • लगाई गई हर पौधे को पाल-पोसकर बड़ा करें

  • बच्चों को भी पेड़ों की अहमियत समझाएं


अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ आयोजन

इस पौधारोपण कार्यक्रम में राज्यपाल के साथ कोरबा कलेक्टर श्री अजीत वसंत सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


मुख्य बातें (Key Highlights):

  • राज्यपाल रमेन डेका ने कोरबा में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत बादाम का पौधा रोपा

  • पेड़ को मां से जोड़कर पर्यावरण के प्रति भावनात्मक चेतना जगाने की अपील

  • पेड़ लगाने से ज्यादा जरूरी है उसे जीवित और सुरक्षित बनाए रखना

  • अभियान का उद्देश्य — प्रकृति से आत्मीय संबंध और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपहार


निष्कर्ष:

“एक पेड़ माँ के नाम” सिर्फ एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक आंदोलन है, जो पेड़ों को सिर्फ ऑक्सीजन देने वाला नहीं, बल्कि मां के आशीर्वाद जैसा पवित्र रूप मानता है।
राज्यपाल का यह संदेश आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जुड़ाव का गहरा पाठ पढ़ाता है।

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