GST विभाग ने इटरनल (जोमैटो) से ₹40 करोड़ की टैक्स डिमांड की, कंपनी जाएगी कोर्ट

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भारतीय GST विभाग ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी इटरनल लिमिटेड (पहले जोमैटो) से करीब ₹40 करोड़ का टैक्स मांगा है। यह डिमांड जुलाई 2017 से मार्च 2020 तक की ऑडिट और जांच रिपोर्ट के आधार पर जारी हुई है।

बेंगलुरु के GST जॉइंट कमिश्नर की ओर से जारी 3 नोटिस में शामिल हैं:

  • ₹17.19 करोड़ GST टैक्स

  • ₹21.42 करोड़ ब्याज

  • ₹1.71 करोड़ पेनल्टी

कंपनी ने बताया कि वह इस डिमांड को कानूनी चुनौती देगी। रेगुलटरी फाइलिंग में कहा गया है कि उन्हें न्यायालय से अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है और वे जल्द ही अपील की प्रक्रिया शुरू करेंगे।


तिमाही नतीजों में कमाई बढ़ी, मुनाफा घटा

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कंपनी ने ₹7,521 करोड़ की कुल कमाई दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में 69% ज्यादा है।
हालांकि, शुद्ध मुनाफा घटकर ₹25 करोड़ रह गया है, जो सालाना आधार पर करीब 90% की गिरावट है। पिछली साल की इसी तिमाही में मुनाफा ₹253 करोड़ था।


क्विक कॉमर्स ने फूड डिलीवरी को पछाड़ा

कंपनी के मुताबिक, इस तिमाही में पहली बार उसका क्विक कॉमर्स बिजनेस (ब्लिंकिट) नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) के मामले में फूड डिलीवरी से आगे निकल गया।

  • ब्लिंकिट की NOV: ₹9,203 करोड़

  • फूड डिलीवरी NOV: ₹8,967 करोड़


कंपनी के नाम और इतिहास की झलक

  • 20 मार्च 2025 को जोमैटो का नाम बदलकर इटरनल लिमिटेड कर दिया गया।

  • 9 अप्रैल 2025 से BSE और NSE पर नए नाम से ट्रेडिंग शुरू हुई।

  • कंपनी की शुरुआत 2008 में दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने फूडीबे नाम से की थी।

  • 2010 में नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया और कुछ ही सालों में इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लॉन्च किया गया।

  • जोमैटो भारत का पहला फूड-टेक यूनिकॉर्न है और 2024 की पहली तिमाही में कंपनी ने पहली बार मुनाफा दर्ज किया था।

  • 2022 में ब्लिंकिट का अधिग्रहण कर ग्रॉसरी डिलीवरी में भी एंट्री ली।


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