छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पीटाकेबिन छात्रावास में बच्चों को फिनायल मिला खाना परोसे जाने के मामले ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस गंभीर लापरवाही पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया और सख्त रुख अपनाया।
⚖️ चीफ जस्टिस का कड़ा रुख
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस घटना को “घोर लापरवाही” करार दिया।
सीजे ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
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“ये लापरवाही नहीं, घोर अपराध है। यदि कोई बड़ी अनहोनी हो जाती, तो इसे संभालना मुश्किल हो जाता।”
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चीफ सेक्रेटरी को शपथपत्र में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।
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मामले की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश भी दिया।
मामले की पूरी कहानी
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घटना सुकमा जिले के पाकेला स्थित पोटाकेबिन छात्रावास की है।
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यहाँ 426 बच्चों को फिनायल मिला भोजन परोसा गया।
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खाने से तेज दुर्गंध आने पर बच्चों ने खाने से इनकार कर दिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई।
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यह खबर सबसे पहले INH NEWS और स्थानीय अखबारों में प्रमुखता से आई।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कठोर रुख अपनाया।
हाईकोर्ट का सख्त संदेश
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएं बच्चों की सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। कोर्ट ने साफ किया कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार अनिवार्य है।
हाइलाइट्स:
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426 बच्चों को परोसा गया फिनायल मिला खाना।
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बच्चों की सूझबूझ से बची बड़ी अनहोनी।
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हाईकोर्ट का सख्त आदेश: “जवाब दो और निगरानी बढ़ाओ।”