छत्तीसगढ़ से वनतारा भेजे गए सफेद भालू-हिरण को वापस लाने की मांग तेज़! SIT जांच से बढ़ी हलचल

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मामले की शुरुआत कहाँ से हुई?
गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर एक बार फिर सुर्खियों में है। हथिनी माधुरी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव तस्करी, वित्तीय गड़बड़ियों और पशु कल्याण से जुड़े मामलों की जांच के लिए 4 सदस्यीय SIT गठित की है। इस बीच, छत्तीसगढ़ के पर्यावरण प्रेमियों ने भी नवा रायपुर जंगल सफारी से भेजे गए दुर्लभ सफेद भालू और हिरण को वापस लाने की मांग कर दी है।


क्या है छत्तीसगढ़ का मामला?

  • अप्रैल 2025 में छत्तीसगढ़ वन विभाग ने वनतारा को सफेद भालू और हिरण दिए।

  • इसके बदले जंगल सफारी को ज़ेब्रा जोड़ा, माउस डियर और मीरकैट मिले।

  • लेकिन क्वारेंटाइन के दौरान नर ज़ेब्रा की सांप के काटने से मौत हो गई।

  • अन्य जानवर अभी भी पर्यटकों को नहीं दिखाए गए।

  • सफारी में ज़ेब्रा-जिराफ जैसे प्राणियों के लिए ₹12 करोड़ के नए बाड़े बनाए गए थे, लेकिन वे अभी खाली हैं।


⚖️ SIT क्या जांचेगी?

  • पशु कल्याण से जुड़े नियमों का उल्लंघन

  • आयात-निर्यात कानून

  • वाइल्डलाइफ़ तस्करी

  • कार्बन क्रेडिट और पानी के संसाधनों का दुरुपयोग

  • वित्तीय अनियमितता

‍⚖️ SIT हेड: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर
अन्य सदस्य:

  • जस्टिस राघवेंद्र चौहान (पूर्व CJ, उत्तराखंड/तेलंगाना HC)

  • हेमंत नगराले (पूर्व पुलिस कमिश्नर, मुंबई)

  • अनीश गुप्ता (IRS अधिकारी)


वनतारा का बयान:
“हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। पारदर्शिता और कानून का पालन हमारी प्राथमिकता है। SIT को पूर्ण सहयोग देंगे। हमारा मिशन केवल पशुओं का बचाव और पुनर्वास है।”


हथिनी माधुरी विवाद का कनेक्शन

  • 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी सेहत को देखते हुए माधुरी को वनतारा भेजने का आदेश दिया।

  • जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा।

  • कोल्हापुर में विरोध प्रदर्शन हुए और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा।

  • अब इसी विवाद ने SIT जांच को जन्म दिया।


फिलहाल बहस के मुद्दे:

  • क्या वनतारा के पास इतने दुर्लभ प्राणियों को रखने का सही लाइसेंस है?

  • क्या राज्य सरकारों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान नियमों के तहत हुआ?

  • क्या यह संरक्षण या निजी शोकेसिंग का मामला है?


आपकी राय?
क्या दुर्लभ जानवरों को सरकारी जंगल सफारियों में ही रहना चाहिए या बेहतर सुविधाओं के लिए प्राइवेट सैंक्चुरीज़ को भेजना सही कदम है?

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