ट्रेड टैरिफ विवाद से रिश्तों में खटास
भारत-अमेरिका संबंधों में ट्रेड टैरिफ विवाद गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल के हफ्तों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार फोन कॉल्स लेने से इनकार कर दिया। कारण—अमेरिका की आक्रामक टैरिफ पॉलिसी और पाकिस्तान पर ट्रंप के रुख से भारत की नाराजगी।
अमेरिकी टैरिफ का झटका
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अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर ड्यूटी 50% तक कर दी।
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रूस से कच्चे तेल पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी लगाया।
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यह कदम भारत को सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में ला खड़ा करता है।
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मोदी सरकार का स्पष्ट संदेश: “देशहित और किसानों के मुद्दे पर समझौता नहीं।”
रणनीतिक बदलाव: चीन की तरफ भारत का झुकाव
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विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब अमेरिका का “एंटी-चाइना मोहरा” नहीं बनेगा।
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नई दिल्ली चीन के साथ नई ट्रेड डील पर काम कर रहा है।
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अगस्त में पीएम मोदी का पहला चीन दौरा तय, SCO समिट में हिस्सा लेंगे।
️ पाकिस्तान फैक्टर
ट्रंप द्वारा भारत-पाक रिश्तों पर “मध्यस्थता” का दावा दिल्ली को खटक रहा है।
भारत का मानना है कि ट्रंप का “डील मेकर” रवैया रिश्तों को और जटिल बना रहा।
विश्लेषकों की राय:
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अमेरिका की “इंडो-पैसिफिक एलायंस” रणनीति कमजोर हो रही।
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भारत-चीन के कई हित कॉमन ग्राउंड पर हैं।
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चीन की टेक्नोलॉजी और निवेश भारत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
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भारत की नई नीति: स्वतंत्र और बहु-ध्रुवीय कूटनीति।
अमेरिका-भारत साझेदारी पर असर:
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बढ़ती टैरिफ नीतियों और दबाव की रणनीति से रिश्ते ठंडे पड़ रहे।
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चीन और रूस इस स्थिति से खुश।
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मोदी का कॉल न उठाना सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि एक सख्त मैसेज और नई विदेश नीति की झलक।