छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: FL-10 लाइसेंस पर उठा तूफ़ान, भूपेश सरकार पर EOW का आरोप

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अपडेट: EOW ने कोर्ट में 6वां चालान पेश कर घोटाले का नया पैटर्न उजागर किया।
मुख्य मुद्दा: FL-10 लाइसेंस की मंजूरी, सिंडिकेट का खेल और 248 करोड़ का सरकारी नुकसान।


EOW के चालान में क्या है?

  • फरवरी 2020 में कैबिनेट ने FL-10A/10B लाइसेंस प्रणाली को मंजूरी दी।

  • 1 अप्रैल 2020 से नई आबकारी नीति लागू हुई।

  • मकसद बताया गया: शराब की ब्रांड कमी दूर करने के लिए नई सप्लाई व्यवस्था।

  • प्रस्ताव के तहत विदेशी शराब कंपनियों को भंडारण और सप्लाई का लाइसेंस मिला।


⚠️ रमन सिंह का हमला

विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व CM डॉ. रमन सिंह ने इसे

“भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा अपराध”
बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने खुलेआम सरकारी खजाने में सेंध लगाई।


कांग्रेस का पलटवार

छत्तीसगढ़ PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे भाजपा का षड्यंत्र कहा।
उन्होंने सवाल उठाया:

  • भाजपा शासनकाल में 3% कमीशन की जांच कौन करेगा?

  • महंगे प्रोक्योरमेंट और खेल आयोजनों में गड़बड़ी पर कोई जांच क्यों नहीं?

  • “जांच एजेंसी सिर्फ कांग्रेस के पीछे क्यों?”


चालान के खुलासे:

  • ओम साई बेवरेज के विजय कुमार भाटिया को ₹14 करोड़।

  • नेक्सजेन पावर इंजिटेक के संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा, अभिषेक सिंह को ₹11 करोड़।

  • FL-10 लाइसेंस के जरिए निजी कंपनियों को ठेका देकर ₹248 करोड़ का सरकारी नुकसान

  • सिंडिकेट में पूर्व IAS अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल, अरविंद सिंह शामिल।


FL-10 लाइसेंस क्या है?

  • FL का मतलब: Foreign Liquor (विदेशी शराब)।

  • कैटेगरी A: दूसरे राज्यों से विदेशी शराब की सप्लाई।

  • कैटेगरी B: राज्य के निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब की सप्लाई।

  • कंपनियों को भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का अधिकार, पर ज़िम्मेदारी बेवरेज कॉर्पोरेशन को दी गई।


घोटाले का पैटर्न:

  • सरकारी शराब दुकानों में कमीशन वसूली।

  • डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाकर अवैध बिक्री।

  • विदेशी शराब सप्लाई पर भी “कट” वसूली।


₹3200 करोड़ का खेल

ED की FIR में ₹3200 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का दावा।
राजनेता, IAS अफसर और कारोबारी मुख्य आरोपी।
EOW की ताज़ा रिपोर्ट ने घोटाले के पैमाने और संरचना पर शिकंजा कसा।


निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला अब राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। EOW और ED की जांच तेज़ हो रही है, जबकि कांग्रेस इसे “भाजपा का राजनीतिक हथियार” बता रही है।

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