छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले में सुरक्षाबलों को गुरुवार को बड़ी सफलता हाथ लगी। डेढ़ करोड़ इनामी नक्सली मोडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली एनकाउंटर में ढेर हो गए। इनमें 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल थीं। पुलिस ने सभी के शव बरामद कर लिए हैं और पोस्टमार्टम के लिए रायपुर भेजा जा रहा है।
मारे गए नक्सली और उन पर इनाम
सूत्रों के अनुसार, जिन नक्सलियों को मारा गया उनमें मनोज बालाकृष्णन (CCM), प्रमोद उर्फ पांडु (SZC/ईस्टर्न ब्यूरो), विमल (DVCM/टेक्निकल टीम), विक्रम (सिनापाली ACM), समीर (सिक्योरिटी टीम) शामिल हैं।
साथ ही उमेश (SDK डिप्टी कमांडर), अंजलि (SDK ACM), सिंधु (तकनीकी टीम), रजिता (तकनीकी टीम) और आरती (तकनीकी टीम) का भी सफाया कर दिया गया।
छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकारों ने इन सभी पर मिलाकर 3 करोड़ 4 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
बीजापुर में भी 2 नक्सली मारे गए
इसी बीच, बीजापुर ज़िले में भी जवानों ने शुक्रवार सुबह दो नक्सलियों को मार गिराया। यहां से एक 303 राइफल और बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए। बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि की है।
बालकृष्ण तक कैसे पहुँची पुलिस?
दरअसल, मोडेम बालकृष्ण के नजदीकी गार्ड कैलाश ने हाल ही में सरेंडर किया था। इसी से पुलिस को उसके ठिकानों की गुप्त जानकारी मिली। गुरुवार सुबह STF, कोबरा और CRPF की संयुक्त टीम ने मैनपुर थाना क्षेत्र के मटाल पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों तक चली मुठभेड़ में बालकृष्ण समेत पूरा दस्ता ढेर हो गया।
रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि इलाके में IED होने की आशंका के चलते रातभर सर्च ऑपरेशन रोका गया। अब शव बरामद कर रायपुर लाए जा रहे हैं।
बालकृष्ण की भूमिका
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बालकृष्ण ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था।
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चलपति के मारे जाने के बाद उसे गरियाबंद, धमतरी और नुआपड़ा में नक्सली गतिविधियों को बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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25 साल से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहा था।
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पुलिस के अनुसार, वह शुगर की बीमारी से ग्रस्त था, उसके सिर के बाल झड़ चुके थे और चलने के लिए दो लाठियों का सहारा लेता था।
जनवरी में 16 नक्सली मारे गए थे
यह पहली बार नहीं है कि गरियाबंद में इतनी बड़ी कार्रवाई हुई हो। इसी साल 14 जनवरी को करीब 80 घंटे चले ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें सेंट्रल कमेटी सदस्य चलपति भी शामिल था, जिस पर 90 लाख का इनाम था।
शाह की डेडलाइन और तेज़ हुए ऑपरेशन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया किया जाएगा। इसके बाद से बस्तर और आसपास के इलाकों में लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे हैं।
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मई 2025 में 27 नक्सली मारे गए थे, जिनमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था।
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कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में 31 नक्सलियों का सफाया हुआ था।
गरियाबंद का यह एनकाउंटर इस बात का संकेत है कि अब नक्सल संगठन के टॉप लेवल लीडर भी सुरक्षित नहीं हैं और सुरक्षा बल उनकी पकड़ तक पहुँच चुके हैं।