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UN में भारत का हमला—’पाकिस्तान अपने ही लोगों पर बम गिराता है, जो 4 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार कर चुका, उसे दूसरों को पढ़ाने का अधिकार नहीं’

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बुधवार को कश्मीर पर हुई खुली बहस में भारत की ओर से कड़ा मोर्चा देखा गया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह “अपनी मानवता पर ही प्रश्न उठाने” वाली हरकतें करता रहा है और अब दूसरों को सीख देने का दावा नहीं कर सकता।


क्या कहा भारत ने?

  • हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पाकिस्तान ने खुद अपने लोगों पर बम गिराए, और 1971 में चलाए गए अभियान के दौरान सैकड़ों हज़ारों महिलाओं के साथ अमानवीय अत्याचार हुए।

  • उनका तर्क था कि जो देश अपने नागरिकों के साथ इस तरह का इतिहास रखता है, वह कश्मीरी महिलाओं के बारे में “बयानबाज़ी” कर दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

  • भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मामले में होने वाले आरोप-प्रत्यारोप से भारत का आंतरिक मामला प्रभावित नहीं होगा।


किस संदर्भ में यह बयान आया?

  • यह कहा तभी गया जब एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कश्मीरी महिलाओं पर यौन हिंसा के पुरजे दावे उठाए। भारत ने उन दावों को राजनीति व प्रचार करार दिया।

  • हरीश ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का ज़िक्र कर पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन और संगठित दमन के आरोपों को दोहराया — एक ऐतिहासिक आरोप जिसका हवाला अक्सर दोनों देशों के बीच बहसों में दिया जाता है।


हालिया घटनाएँ और जुड़ी टिप्पणियाँ

  • रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी क्षेत्र में हालिया हवाई हमलों में नागरिक हताहत भी हुए — जिसे लेकर दोनों तरफ तनाव और कड़े बयानों का दौर जारी है।

  • भारत ने जिनेवा की मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए थे, जबकि पाकिस्तान के कुछ नेताओं ने कड़ा रुख अपनाकर भारत पर ‘युद्ध की धमकी’ भी दे दी।

  • पाकिस्तान की ओर से भी भारत के सैन्य और राजनयिक बयानों को उकसाने वाला करार दिया गया है—दोनों तरफ आक्रामक शब्दों का आदान-प्रदान बढ़ा है।


सार यह कि संयुक्त राष्ट्र में चल रही इस ज़ोरदार नोंकझोंक ने एक बार फिर दोनों देशों के इतिहास, मानवाधिकार आरोपों और संवेदनशील क्षेत्र कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से गर्म कर दिया है। स्थिति को कूटनीतिक कड़वाहट और सुरक्षा चिंताओं के रूप में देखा जा रहा है — और दोनों तरफ़ के बयान आगे के कूटनीतिक और संवेधानिक प्रतिउत्तर को जन्म दे सकते हैं।

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