छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले को हिला देने वाले डबल मर्डर केस में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यहां हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या की गई और मासूम बेटी को भी बेरहमी से चाकू से गोदकर मार डाला गया। घटना के बाद दोनों के शव नग्न अवस्था में घर से 5 किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।
इस वारदात का मास्टरमाइंड कुलदीप साहू है, जो कबाड़ कारोबारी और कुख्यात अपराधी बताया जाता है। उसके साथ NSUI नेता चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा और रिंकू सिंह ने हत्या की, जबकि दो अन्य आरोपियों ने फरार होने में मदद की। कुल 5 आरोपी जेल में हैं और केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन है।
घटनाक्रम कैसे शुरू हुआ?
9 अक्टूबर को एक जगराता कार्यक्रम के दौरान कुलदीप साहू के भाई संदीप का कुछ युवकों से झगड़ा हुआ था। 2 दिन बाद पुलिस ने संदीप को उठाया और थाने में पिटाई की। इसे लेकर कुलदीप आगबबूला हो गया। हेड कॉन्स्टेबल से उसका पुराना विवाद भी था, इसी रंजिश में उसने यह खूनी साज़िश रची।
⚔️ धमकी से लेकर हत्या तक
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13 अक्टूबर को शाम को कुलदीप ने हेड कॉन्स्टेबल को तलवार से काट देने की धमकी दी।
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रात को वह अपने साथियों के साथ कॉन्स्टेबल के घर पहुंचा।
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वहां पत्नी से पहले रेप किया, फिर धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी।
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बेटी के कपड़े उतारकर कई वार किए और उसकी भी जान ले ली।
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दोनों शवों को नग्न हालत में 5 किलोमीटर दूर फेंक दिया।
14 अक्टूबर को जब हेड कॉन्स्टेबल ड्यूटी से घर लौटा तो चारों ओर खून बिखरा मिला, लेकिन पत्नी-बेटी नहीं थीं। अगली सुबह जंगल से उनके शव बरामद हुए।
पुलिस पर हमला और गिरफ्तारी
वारदात के बाद जब पुलिस ने कुलदीप को पकड़ने की कोशिश की तो उसने टीम पर फायरिंग की और भाग निकला। झारखंड तक फरार होने के बाद उसे बलरामपुर पुलिस ने पकड़ लिया। घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने कुलदीप की गाड़ियों में आग लगा दी और उसके घर पर हमला किया।
⚖️ कोर्ट ट्रायल और गवाहियां
मामले की सुनवाई सूरजपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है। अभियोजन पक्ष के वकील के मुताबिक अब तक 33 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। पुलिस, फोरेंसिक और साइबर टीम की गवाही अभी बाकी है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पत्नी से रेप की पुष्टि हुई, जिसके बाद IPC की रेप से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गईं।
जनता का गुस्सा और सियासी घमासान
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घटना के बाद भीड़ ने चक्का जाम और प्रदर्शन किए।
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आरोपियों का पुतला फांसी पर लटकाकर सजा की मांग की।
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पुलिस परिवार और आम जनता ने आरोपियों को 15 दिन के भीतर फांसी देने की अपील की।
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इस घटना को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गईं।
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सरकार ने SP को हटा दिया, लेकिन सिटी कोतवाली थाना प्रभारी पदस्थ रहे।
यह केस ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ माना जा रहा है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल तेजी से चल रहा है और जनता की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।