नई दिल्ली। चुनाव आयोग सोमवार शाम 4:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा ऐलान करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी देशभर में SIR लागू करने की तारीखों का ऐलान करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, SIR की शुरुआत अगले हफ्ते से होने जा रही है। पहले चरण में उन 10–15 राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी, जहां अगले एक साल में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं—जैसे असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल।
क्यों हो रहा है SIR?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मुख्य उद्देश्य है—
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मतदाता सूचियों को अपडेट करना
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डुप्लीकेट वोटरों को हटाना
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यह सुनिश्चित करना कि हर मतदाता भारतीय नागरिक है
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अवैध प्रवासियों को वोटर लिस्ट से बाहर करना
चुनाव आयोग का फोकस खासकर उन राज्यों पर है, जहां बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध प्रवासियों की समस्या बार-बार सामने आती रही है।
2 दशक बाद बड़े स्तर पर समीक्षा
लगभग 20 साल बाद यह प्रक्रिया फिर से शुरू हो रही है। वजह है लगातार बढ़ता शहरीकरण और माइग्रेशन।
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आंध्र प्रदेश में 2003-04 में 5.5 करोड़ वोटर थे, अब 6.6 करोड़ हो चुके हैं।
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उत्तर प्रदेश में 2003 में 11.5 करोड़ मतदाता थे, अब यह संख्या 15.9 करोड़ तक पहुंच गई है।
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दिल्ली में 2008 में 1.1 करोड़ वोटर थे, अब यह बढ़कर 1.5 करोड़ हो चुके हैं।
प्रक्रिया ऐसे चलेगी
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बीएलओ (Booth Level Officers) हर मतदाता के घर जाकर प्री-फिल्ड फॉर्म देंगे।
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31 दिसंबर 2025 तक जिनकी उम्र 18 वर्ष पूरी होगी, उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।
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देशभर में कुल मतदाता संख्या फिलहाल 99.1 करोड़ है।
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इनमें से बिहार के 8 करोड़ वोटरों की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
राज्यवार हालात
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दिल्ली में आखिरी SIR 2008 में हुई थी।
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उत्तराखंड में यह प्रक्रिया 2006 में हुई थी।
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बिहार में हाल ही में वोटर वेरिफिकेशन किया गया और फाइनल डेटा 1 अक्टूबर को जारी हुआ।
बिहार में विवाद और सुप्रीम कोर्ट की मुहर
बिहार में पहले भी SIR को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। विपक्ष ने सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने हालांकि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही माना और आयोग की ओर से पेश की गई अंतिम वोटर लिस्ट को मंजूरी दी।
अब देखना होगा कि चुनाव आयोग के इस बड़े कदम से आने वाले चुनावों में मतदाता सूची कितनी पारदर्शी और सटीक बन पाती है।