खेल की दुनिया में वापसी की कहानियां हमेशा दिल छू लेती हैं। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में बीती शाम भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब जेमिमा रोड्रिग्स ने अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी, और भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे यादगार पारी खेली।
वो सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि जज़्बे, धैर्य और आत्मविश्वास की जंग थी। वो पल था जब एक खिलाड़ी ने अपने टूटे हुए विश्वास को फिर से जोड़ा — और दुनिया को दिखा दिया कि जज़्बा अगर सच्चा हो, तो वक्त भी झुक जाता है।
वो कैच जो इतिहास बदल गया
वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत को 339 रन का पहाड़ जैसा लक्ष्य मिला था। जब जेमिमा 82 रन पर थीं, तब उन्होंने एलेना किंग की गेंद पर स्लॉग स्वीप खेला। गेंद हवा में ऊंची उठी, और पूरा स्टेडियम सांस रोके देखने लगा।
गेंद सीधी एलीसा हीली के हाथों में जा रही थी — और फिर… वो फिसल गई। शायद ऊपर वाले ने तय कर लिया था कि आज इतिहास बदलना है।
वो सिर्फ एक ड्रॉप कैच नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए किस्मत का इशारा था — कि अब वक्त आ गया है, ऑस्ट्रेलिया का घमंड टूटने का।
दूसरा मौका, और अटूट इरादा
हीली का कैच छूटने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने एलबीडब्ल्यू रिव्यू लिया। स्क्रीन पर दो रेड और एक ग्रीन दिखे — गेंद स्टंप्स के ऊपर जा रही थी। भीड़ शोर में फट पड़ी।
जेमिमा ने बस हल्की मुस्कान दी — वो मुस्कान जो कह रही थी, “अब मुझे कोई नहीं रोक सकता।”
इसके बाद हर गेंद, हर रन, हर शॉट में सिर्फ जिद थी — खुद को साबित करने की, देश को गर्व दिलाने की।
वो रातें जब वो टूटी थीं
जेमिमा की यह वापसी एक दिन की नहीं थी। यह कहानी है सालों की खामोशी, महीनों के आंसू और टूटे आत्मविश्वास की लड़ाई की।
2022 में वो खराब फॉर्म के चलते टीम से बाहर कर दी गईं। 2025 वर्ल्ड कप में दो बार शून्य पर आउट होकर फिर ड्रॉप हुईं। उन्होंने बाद में कहा था —
“कई दिन ऐसे थे जब मैं बस कमरे में बैठकर रोती थी। लगा अब सब खत्म हो गया है।”
लेकिन खेल की खूबसूरती यही है — यह हमेशा दूसरा मौका देता है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ वापसी करते हुए उन्होंने 76 रन बनाए, और फिर उसी आत्मविश्वास के साथ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरीं।
हरमनप्रीत के साथ 167 रन की साझेदारी
स्मृति मंधाना के जल्दी आउट होने के बाद नवी मुंबई का स्टेडियम सन्नाटा ओढ़ चुका था। तभी नंबर 3 पर अचानक मैदान में उतरीं जेमिमा।
पहले पांच ओवर तक वो संयम से खेलती रहीं। फिर धीरे-धीरे उन्होंने खेल का रंग बदलना शुरू किया —
किम गार्थ पर स्कूप शॉट, एश्ले गार्डनर पर कवर ड्राइव, और बैकवर्ड पॉइंट से चौका।
हर बाउंड्री के साथ भीड़ की उम्मीदें लौटती गईं।
हरमनप्रीत कौर के साथ 167 रन की साझेदारी ने खेल को भारत के पाले में झुका दिया।
कप्तान 89 रन पर आउट हुईं, लेकिन जेमिमा नहीं डगमगाईं।
उन्होंने एक छोर थामे रखा और 117 गेंदों में शतक पूरा किया — बिना किसी सेलिब्रेशन के, सिर्फ हल्की मुस्कान के साथ।
वो मुस्कान जैसे कह रही थी — “अभी काम पूरा नहीं हुआ।”
जब जीत के साथ टूटी जेमिमा
अंतिम ओवर में जब अमनजोत कौर ने दो चौके जड़े, तो भारत इतिहास रच चुका था।
जेमिमा घुटनों पर गिर गईं। आंखों से आंसू बह रहे थे — लेकिन वो आंसू हार के नहीं, विजय और राहत के थे।
साथी खिलाड़ी दौड़कर आईं, उन्हें गले लगाया।
पूरा स्टेडियम खड़ा था — तालियां, शोर, और भावनाएं… सब एक साथ उमड़ पड़े थे।
यह सिर्फ एक पारी नहीं थी —
यह आत्मविश्वास, धैर्य, और उस सपने की जीत थी, जो कभी अधूरा रह गया था।
“मैंने शतक का जश्न नहीं मनाया” – जेमिमा
मैच के बाद जेमिमा ने कहा –
“जब मैं फिफ्टी या हंड्रेड पर पहुंची, तो मैंने कोई जश्न नहीं मनाया, क्योंकि मेरे लिए असली जश्न भारत की जीत थी। मुझे कल सुबह उठकर यह एहसास चाहिए था कि हम फाइनल में हैं।”
स्पोर्ट्स की सबसे खूबसूरत वापसियों में एक
खेल इतिहास में ऐसी वापसियां बहुत कम होती हैं।
जैसे 2023 विश्व चैंपियनशिप में गिरने के बाद फेमके बोल का उठना और ओलंपिक में स्वर्ण जीतना,
या 35 वर्षीय राफेल नडाल का 2022 ऑस्ट्रेलियन ओपन में दो सेट से पीछे रहकर जीत दर्ज करना।
अब उस सूची में एक और नाम जुड़ गया है —
जेमिमा रोड्रिग्स।
वो खिलाड़ी जिसने अपनी खामोशी को चीखों में बदला,
और दुनिया को बताया — कि जब एक भारतीय लड़की गिरती है, तो वो और ऊंचा उठती है।