भारत की अग्रणी आईवियर कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) ने अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) लॉन्च कर दिया है।
31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक खुला यह पब्लिक इश्यू मार्केट में जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है।
कंपनी ने प्राइस बैंड 382 से 402 रुपये प्रति शेयर तय किया है, और इस ऑफर के ज़रिए वह लगभग 70,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन हासिल करने की कोशिश में है।
IPO का आकार और विवरण
लेंसकार्ट का कुल आईपीओ आकार ₹7,278 करोड़ का है, जिसमें से
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₹2,150 करोड़ के नए शेयर (Fresh Issue) जारी होंगे,
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जबकि 12.75 करोड़ शेयरों की बिक्री (Offer for Sale – OFS) की जाएगी।
निवेशकों को कम से कम 37 शेयरों का लॉट लेना होगा, यानी न्यूनतम निवेश लगभग ₹14,874 रुपये रहेगा।
शेयरों का अलॉटमेंट 5 नवंबर को और लिस्टिंग 10 नवंबर को तय की गई है।
ग्रे मार्केट में बढ़ी गर्मी
लिस्टिंग से पहले ही लेंसकार्ट के शेयरों को ग्रे मार्केट में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
वेबसाइट InvestorGain के अनुसार, लेंसकार्ट के अनलिस्टेड शेयरों में लगभग 18.4% का प्रीमियम चल रहा है,
जबकि IPO Watch ने इसे 11.4% के आसपास बताया है।
इसका मतलब है कि लिस्टिंग के दिन निवेशकों को शुरुआती मुनाफा मिलने की पूरी संभावना है, बशर्ते बाजार का मूड सकारात्मक बना रहे।
कंपनी की ताकतें: मजबूत ब्रांड और इनोवेटिव मॉडल
लेंसकार्ट की सबसे बड़ी ताकत उसका ओमनी-चैनल बिज़नेस मॉडल है — यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर उसकी मजबूत पकड़।
कंपनी के पास हैं —
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AI और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान,
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तेज़ी से बढ़ती अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति,
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और प्रति स्टोर औसत इनकम लगभग ₹2.4 करोड़।
इन खूबियों के कारण लेंसकार्ट भारत के साथ-साथ विदेशों में भी तेज़ी से विस्तार कर रही है।
इसके अलावा, अरबपति निवेशक राधाकिशन दमानी ने भी कंपनी में ₹90 करोड़ का निवेश कर अपना भरोसा जताया है, जिससे कंपनी की साख और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों की राय: सब्सक्राइब करें या इंतज़ार करें?
बाजार विशेषज्ञों की राय इस IPO पर मिश्रित है।
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स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट की हेड शिवानी न्याती ने इसे “न्यूट्रल” रेटिंग दी है, यानी निवेशक इसमें सावधानी बरतें।
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जबकि चॉइस ब्रोकिंग ने इसे “सब्सक्राइब फॉर लॉन्ग टर्म” की सलाह दी है, क्योंकि कंपनी का बिज़नेस मॉडल लंबी अवधि में मजबूत दिखता है।
जोखिम के पहलू: कहां से आ सकता है झटका?
हालांकि ब्रांड की चमक और बाजार का हाइप दोनों ही ऊंचे हैं, लेकिन कुछ जोखिम भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार —
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भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 70–77% आईवियर मार्केट अभी भी अनऑर्गनाइज्ड है।
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कंपनी की सप्लाई चीन पर निर्भर है, जिससे ग्लोबल परिस्थितियों का असर पड़ सकता है।
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साथ ही, गुरुग्राम मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पर अत्यधिक निर्भरता भी एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क है।
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और सबसे अहम, कई एनालिस्ट मानते हैं कि कंपनी का वैल्यूएशन कुछ ज़्यादा महंगा है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Lenskart IPO भारतीय स्टॉक मार्केट में फिलहाल चर्चा का केंद्र है।
कंपनी की ब्रांड वैल्यू, तकनीकी बढ़त और निवेशकों का भरोसा इसे आकर्षक बना रहे हैं,
लेकिन ऊंची प्राइसिंग और सेक्टर की अनऑर्गनाइज्ड प्रकृति इसे थोड़ा रिस्की भी बनाती है।
शॉर्ट टर्म में लिस्टिंग गेन की संभावना अच्छी है,
परंतु लॉन्ग टर्म निवेशकों को कंपनी की ग्रोथ और मुनाफे के ट्रेंड पर नज़र रखनी चाहिए।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| IPO ओपनिंग डेट | 31 अक्टूबर 2025 |
| क्लोजिंग डेट | 2 नवंबर 2025 |
| प्राइस बैंड | ₹382 – ₹402 प्रति शेयर |
| लॉट साइज | 37 शेयर |
| न्यूनतम निवेश | ₹14,874 |
| फ्रेश इश्यू | ₹2,150 करोड़ |
| OFS (बिक्री ऑफर) | 12.75 करोड़ शेयर |
| अलॉटमेंट डेट | 5 नवंबर 2025 |
| लिस्टिंग डेट | 10 नवंबर 2025 |
| ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) | 11% – 18% |
| रेटिंग | न्यूट्रल से पॉजिटिव |
| लॉन्ग टर्म व्यू | सब्सक्राइब विद कॉशन |
निष्कर्ष: क्या करें निवेशक?
अगर आप शॉर्ट टर्म ट्रेडर हैं तो लिस्टिंग गेन के लिए निवेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
लेकिन अगर आप लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर हैं, तो कंपनी के फंडामेंटल्स, वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लें।
क्योंकि फिलहाल लेंसकार्ट न सिर्फ एक स्टाइल ब्रांड है, बल्कि भारत के रिटेल टेक सेगमेंट में उभरती हुई बड़ी कहानी भी बन रही है।