छत्तीसगढ़ में डायल 112 इमरजेंसी नंबर की जरूरत कभी ना कभी किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती हैं। इस नंबर पर कॉल करते ही पुलिस, फायर सेफ्टी, एम्बुलेंस जैसी कोई भी इमरजेंसी सेवाएं आप तक उपलब्ध हो जाती है। साल 2018 से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ के करीब 1.70 करोड़ लोगों ने 112 नंबर पर डायल किया है। हालांकि, इसमें सहायता योग्य कॉल की संख्या करीब 46 लाख थी। 2018 से अब तक करीब 4 लाख 27 हजार 463 रोड एक्सीडेंट में लोगों को मदद पहुंचाई गई। जिससे उनकी जान बच सकी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के करीब 17 जिलों में डायल 112 की सुविधा उपलब्ध है। सरकार और पुलिस प्रशासन दूसरे चरण में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस इमरजेंसी सहायता पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
कॉल के बाद तुरंत निकलती है गाड़ी
डायल 112 में पोस्टेड सब इंस्पेक्टर सिंधु साहू ने बताया कि 17 जिलों से कोई मदद के लिए कॉल करता है तो रायपुर के सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर में ही कॉल रिसीव होता है। कोई भी कॉलर जब फोन करता है। तो कॉल रिसीव करने के लिए कॉल टेकर होता है। यह कॉल टेकर व्यक्ति से सभी बुनियादी जानकारी पूछता है। जैसे घटना किस संबंध में हैं, कहां पर हुई है, घटना क्या हुई है, वर्तमान स्थिति क्या है?
फिर वहां से कॉल डिस्पेजर सेक्शन में जाता हैं। डिस्पेजर सेक्शन घटनास्थल के आसपास मौजूद रिस्पांस व्हीकल (डायल 112 की गाड़ी) को संबंधित जगह पर जाने के लिए कहता है। अगले चरण में ERV (इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल) इवेंट को कंफर्म करता है कि वह घटनास्थल के लिए निकल चुका है।
इस दौरान दूरी सामने स्क्रीन पर दिखती है। मौके पर जो भी सहायता उपलब्ध करानी होती है, उसे उपलब्ध करवाकर क्लोजर रिपोर्ट भेजता है। जिसके बाद डिस्पेजर सेक्शन उसे बंद करता है।
एक ही जगह से 2 व्यक्तियों ने किया कॉल
SI सिंधु ने सवाल का जवाब देते हुए बताया कि यदि एक ही जगह से 2 व्यक्तियों ने 112 में कॉल किया है। तो उस स्थिति में कॉल टेकर घटनास्थल के लोकेशन को क्रॉस चेक करता है। घटनास्थल समान होने पर इवेंट को जोड़ दिया जाता है।
यदि घटनास्थल अलग-अलग है तो ऐसी स्थिति में 2 अलग-अलग इवेंट के लिए रिस्पांस व्हीकल को रवाना किया जाता है। इवेंट मर्ज करने की ज्यादातर स्थिति तब बनती है, जब सड़क हादसा या आगजनी से जुड़ी कोई घटना होती है।
कॉल के अलावा सोशल मीडिया से भी ले सकते हैं मदद
इमरजेंसी परिस्थिति में 112 में ज्यादातर लोग फोन से संपर्क करते हैं। लेकिन इसके अलावा 112 की सहायता लेने के लिए वॉट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है। यह उन मौकों पर काम आता है, जहां से कॉल करना संभव नहीं हो पाता है।
कॉलर का नाम होता हैं गोपनीय
SI सिंधु ने बताया कि लोगों को इस बात से डरने की जरूरत नहीं है कि 112 में कॉल करने से उन्हें भी केस में इन्वॉल्व होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रावधान बनाए गए हैं, इसमें 112 में कॉल करने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इस बात से डरने की जरूरत नहीं कि उन्हें केस में गवाह बनाया जाएगा या कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
17 जिलों में चल रही डायल 112 सेवा
वर्तमान में डायल 112 योजना रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बस्तर, कबीरधाम, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सरगुजा, सक्ती, मानपुर-मोहला अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-गंडई-छुईखदान, गरियाबंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे 17 जिलों में संचालित हो रही है।
दूसरे चरण में डायल 112 का अन्य जिलों में शुरुआत किया जाना प्रस्तावित है। डायल 112 के माध्यम से 2018 से लेकर 2025 तक करीब 4 लाख 27 हजार 463 रोड एक्सीडेंट में लोगों को सहायता दी गई है। जिससे उनकी जान बच गई।