छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सीजन के बीच प्रशासन ने बड़ा और सख़्त कदम उठाया है। बेमेतरा और बलौदाबाजार जिलों में हड़ताल और लापरवाही के कारण उपार्जन कार्य बाधित होने लगा था, जिससे किसानों को परेशानी बढ़ रही थी। लगातार चेतावनियों के बावजूद कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, तो प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 36 कर्मचारियों को सेवा से अलग कर दिया। इनमें बेमेतरा जिले की 6 समितियों के 23 कर्मचारी शामिल हैं, जबकि बलौदाबाजार जिले में ESMA के तहत 13 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।
बेमेतरा जिले के कंटेली, बीजभाट, जिया, कुसुमी, मोहतरा और लोलेसरा समितियों में काम प्रभावित होने के बाद प्राधिकृत अध्यक्षों ने किसान हित को प्राथमिकता देते हुए लापरवाह कर्मचारियों को सेवा से बाहर करने का फैसला लिया। प्रशासन का साफ कहना है कि धान खरीदी जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की देरी या अनुपस्थिति किसानों की आजीविका से सीधा जुड़ा मामला है, ऐसे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
बलौदाबाजार जिले में हालात और भी गंभीर थे। खरीदी सीजन की शुरुआत के साथ ही कर्मचारियों की हड़ताल ने टोकन वितरण, तौल और उठाव व्यवस्था को ठप कर दिया था। कई समितियों में किसान घंटों लाइन में खड़े रहे, जिसके बाद प्रशासन ने अति आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून यानी ESMA लागू कर कार्रवाई की। इसी क्रम में 13 कर्मियों को बर्खास्त किया गया और तीन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का प्रस्ताव शाखा प्रबंधक को भेजा गया।
सिमगा और कसडोल विकासखंड के जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, उनमें प्रबंधक से लेकर विक्रेता और कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल हैं। इनके खिलाफ आरोप है कि हड़ताल के दौरान इन्होंने धान खरीदी कार्य को जानबूझकर बाधित किया और किसानों को असुविधा में डाला। अब तीन कर्मचारियों—राजेंद्र चंद्राकर, बीरेंद्र साहू और टीका राम वर्मा—के खिलाफ आपराधिक मामले की तैयारी की जा रही है।
जिला प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि धान खरीदी जैसे संवेदनशील कार्य में किसी भी तरह की अनावश्यक हड़ताल को गंभीर अपराध माना जाएगा। यदि कोई कर्मचारी आगे भी काम में बाधा डालता है, तो कार्रवाई और कड़ी होगी। इसी बीच किसानों को राहत देने के लिए वैकल्पिक स्टाफ की नियुक्ति कर केंद्रों को चालू रखा गया है, ताकि उपार्जन सुचारू रूप से चलता रहे।
धान खरीदी में अव्यवस्था को रोकने और किसान हित बचाने के लिए प्रशासन का यह कदम अब पूरे प्रदेश में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।