कोरबा जिले के जोगीपाली गांव में लकड़ी तस्करों की दबंगई उस समय सामने आई जब देर रात साल की लकड़ी काटकर तस्करी करने वालों ने वन विभाग की टीम पर ही हमला कर दिया। घटना करतला वन परिक्षेत्र के रामपुर सर्किल की है, जहां परिक्षेत्र सहायक चमरू सिंह कंवर और बीट गार्ड गजाधर राठिया हाथी ड्यूटी के दौरान क्षेत्र में मुनादी कर रहे थे। इसी बीच उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि पटेल परिवार के कुछ ग्रामीण नावाडीह के जंगल में साल पेड़ों को काटकर ट्रैक्टर में लोड कर तस्करी की तैयारी कर रहे हैं।
सूचना पर दोनों अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां तीन बड़े साल के लट्ठों को ट्रैक्टर में लादा जा रहा था। जैसे ही वन कर्मचारियों ने छापा मारा, तस्करों में भगदड़ मच गई। लेकिन भागने के बजाय तस्कर वनकर्मियों पर ही टूट पड़े। गजाधर राठिया और चमरू सिंह कंवर को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, उनकी वर्दी फाड़ी गई और उनका मोबाइल भी लूट लिया गया। मारपीट कर तस्करों ने दोनों को गांव की ओर घसीट कर ले गए, जहां 20–25 ग्रामीण भी हमले में शामिल हो गए। पिटाई के दौरान एक कर्मचारी बेहोश होकर गिर पड़ा। किसी तरह दोनों कर्मचारी जान बचाकर वहां से निकले और रात करीब 2 बजे मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी।
घटना की गंभीरता समझते हुए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत करतला थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मनाराम पटेल, अंकुश पटेल, चंद्रशेखर पटेल, प्रमोद पटेल, बंधूराम पटेल, शिवप्रसाद पटेल, गनपत पटेल, मनोज पटेल, संजय पटेल, महेंद्र उर्फ भोला समेत कई आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 221, 132, 121, 191(2), 296, 351(3) और 304(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
वन विभाग के कर्मचारियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। बताया जा रहा है कि कर्मचारी सोमवार को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करेंगे। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विभागीय कर्मचारी आंदोलन पर उतर सकते हैं। घटनास्थल और उसके आसपास लगातार हो रही लकड़ी तस्करी ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि तस्करों का बेखौफ व्यवहार संकेत देता है कि जंगलों में अवैध कटाई लगातार हो रही है और तस्करों के हौसले बेहद बुलंद हैं।
अब वन विभाग पर दबाव है कि कोरबा वनमंडल के सभी रेंज में चौकसी और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, ताकि जंगल और वनकर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।