विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश की राजनीति अब उबाल पर है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को पूरी तरह राष्ट्रीय मंच पर ले जाने का फैसला कर लिया है। मंगलवार, 18 नवंबर को पार्टी ने बारह राज्यों के शीर्ष नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसकी अगुवाई पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल सहित प्रदेश प्रभारी, राज्य अध्यक्ष, विधायी दलों के नेता और CWC के वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। चर्चा का केंद्र रहा SIR और इसके चलते मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की बढ़ती शिकायतें।
बैठक के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि कांग्रेस दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली करके SIR के खिलाफ निर्णायक संघर्ष शुरू करेगी। खड़गे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कहा कि कांग्रेस किसी भी हालत में असली मतदाताओं के नाम हटाने नहीं देगी। उनका आरोप था कि जिस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा लगातार कम हो रहा है, उस समय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली चिंता पैदा कर रही है। खड़गे के मुताबिक आयोग को खुलकर यह बताना चाहिए कि वह भाजपा की दबाव राजनीति से प्रभावित नहीं है, क्योंकि कांग्रेस का दावा है कि भाजपा SIR को वोट चोरी का आयोजन बनाकर पेश कर रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग ने इस पर चुप्पी साधे रखी, तो इसे उसकी मिलीभगत के रूप में देखा जाएगा।
कांग्रेस का कहना है कि वह फर्जी मतदाताओं को जोड़ने और असली मतदाताओं को सूची से हटाने जैसी हर कोशिश को सार्वजनिक करेगी और उसे देशभर में मुद्दा बनाएगी। SIR के खिलाफ विरोध की लहर अब कई राज्यों में फैल चुकी है। पश्चिम बंगाल में जहां यह आंदोलन पहले ही जोर पकड़ चुका था, वहीं अब केरल और तमिलनाडु में भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
तमिलनाडु में स्थिति और जटिल हो गई है, क्योंकि राजस्व कर्मचारी संघों ने SIR के खिलाफ कामकाज का बहिष्कार शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि जिस तरह के भारी काम का बोझ, स्टाफ की कमी, सीमित समय और अधूरी ट्रेनिंग के भीतर सरकार SIR पूरा करने का दबाव डाल रही है, वह किसी भी तरह व्यावहारिक नहीं है। उधर केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR को स्थानीय निकाय चुनावों के पूरा होने तक स्थगित करने की मांग की है। IUML ने भी अलग से याचिका दायर कर यह सवाल उठाया है कि जब 9 और 11 दिसंबर को स्थानीय चुनाव होने वाले हैं और SIR का ड्राफ्ट 4 दिसंबर को जारी होना है, तो दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ चलाना असंभव हो जाता है।
इन सबके बीच चुनाव आयोग ने दावा किया है कि बारह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 50 करोड़ से अधिक फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं और 98 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं तक ये फॉर्म पहुंच चुके हैं। पश्चिम बंगाल से मिली लगातार शिकायतों—खासकर प्रवासी मजदूरों की तस्वीरों के गलत इस्तेमाल—को देखते हुए आयोग अब AI–आधारित फेशियल रिकग्निशन तकनीक अपनाने पर विचार कर रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य मृत मतदाताओं और फर्जी पहचान वाले नामों को चिन्हित करना है। हालांकि BLO को घर–घर जाकर फोटो और हस्ताक्षर की जांच करनी ही होगी, और किसी भी त्रुटि की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर तय होगी।
इन तमाम आरोपों, विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक बयानों के बीच SIR देशव्यापी विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस इसे अब एक बड़े राष्ट्रीय संघर्ष की तरह पेश कर रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ाता नजर आएगा।