सोडियम से बनी नई सॉलिड-स्टेट बैटरी EV दुनिया में क्रांति ला सकती है, कीमत भी कम और परफॉर्मेंस भी बेहतर।
इलेक्ट्रिक वाहनों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच बैटरी की कीमत और तकनीक सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। लिथियम-आयन बैटरियों की सीमाएँ अब खुलकर सामने आने लगी हैं—चाहे वह सीमित उपलब्धता हो, ऊँची कीमत हो या सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ। इसी बीच कनाडा की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल और मटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग में काम कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक ऐसी खोज पेश की है, जो EV उद्योग की तस्वीर बदल सकती है। डॉ. गंगा झाओ के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक नई सॉलिड-स्टेट सोडियम बैटरी विकसित की है, जिसे लिथियम की जगह सस्ता, सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।
लिथियम-आयन बैटरियाँ लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और इलेक्ट्रिक वाहनों की रीढ़ रही हैं, लेकिन समय के साथ इनके घाटे साफ़ होते गए। लिथियम पृथ्वी में कम मात्रा में पाया जाता है, इसे निकालने की लागत अधिक है और कीमत लगातार बढ़ रही है। इसके विपरीत, सोडियम पृथ्वी की सतह में इतना प्रचुर है कि यह लिथियम की तुलना में कई गुना सस्ता और आसानी से उपलब्ध माना जाता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक लंबे समय से लिथियम के विकल्प तलाश रहे थे, और अब सॉलिड-स्टेट सोडियम बैटरी इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सॉलिड-स्टेट तकनीक अपने आप में एक गेमचेंजर समझी जाती है, क्योंकि इसमें तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल होता है। इससे बैटरी की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है, आग लगने या ओवरहीटिंग का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है। वेस्टर्न यूनिवर्सिटी की टीम ने दावा किया है कि उनका नया प्रोटोटाइप न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि ऊर्जा स्टोरेज क्षमता के मामले में भी पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों की बराबरी कर सकता है, और भविष्य में इन्हें पीछे छोड़ने की पूरी संभावना है।
डॉ. झाओ ने बताया कि सोडियम-आधारित बैटरी बनाना सस्ता भी है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर। लिथियम खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और पानी की भारी बर्बादी को देखते हुए दुनिया भर में सस्टेनेबल विकल्पों की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में सोडियम उन देशों के लिए भी उम्मीद की किरण बन सकता है, जो लिथियम-आधारित सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रहना चाहते।
भारत जैसे देश में, जहां ईवी मार्केट तेज़ी से विस्तार कर रहा है और बैटरी की लागत अब भी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर की कीमत का सबसे बड़ा हिस्सा होती है, सोडियम-आधारित सॉलिड-स्टेट बैटरियाँ गेमचेंजर साबित हो सकती हैं। इनके आने से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें कम होंगी, चार्जिंग जल्दी होगी और सुरक्षा का स्तर भी बढ़ेगा। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले वर्षों में सोडियम-आधारित तकनीक EV उद्योग का भविष्य तय कर सकती है।
यह तकनीक अभी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन जिस गति से शोध आगे बढ़ रहा है, उससे लगता है कि सॉलिड-स्टेट सोडियम बैटरियाँ आने वाले कुछ वर्षों में कमर्शियल स्तर पर नजर आने लगेंगी। यदि ऐसा हुआ तो लिथियम की महंगाई और सप्लाई चेन की दिक्कतें अतीत की बात बन सकती हैं।