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जेपी पावर में 10% की जोरदार छलांग: आखिर शेयर ‘रॉकेट मोड’ में क्यों पहुँचा?

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अडानी की बड़ी डील, कर्जदारों की मंजूरी और जेपी ग्रुप में बढ़ती स्पष्टता—इन्हीं कारकों ने आज JP Power को बाजार का चमकता सितारा बना दिया।

शेयर मार्केट में गुरुवार की सुबह जेपी पावर ने निवेशकों को खुश कर दिया। कंपनी के शेयरों में अचानक 10% से ज्यादा की उछाल देखी गई और कीमत सीधे 22.37 रुपये तक पहुँच गई। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब पूरा जेपी ग्रुप आर्थिक दबावों और भारी कर्ज से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था। लेकिन इस पूरे संकट में आज एक बड़ी राहत आई—जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेज़ॉल्यूशन प्लान को कर्जदाताओं ने मंजूरी दे दी है, और इसी अच्छे समाचार ने बाजार में उत्साह भर दिया।

जेपी पावर के निवेशक इसलिए भी उत्साहित हैं क्योंकि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड कंपनी में लगभग 24% हिस्सेदारी रखता है। JAL दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रहा था, इसलिए उसका भविष्य सीधा JP Power के भविष्य पर भी असर डाल रहा था। अब जब कर्जदाताओं ने अडानी एंटरप्राइजेज के 14,535 करोड़ रुपये वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, तो पूरे ग्रुप के लिए राह कुछ साफ और आसान दिखने लगी है।

जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कुल 57,000 करोड़ रुपये का भारी कर्ज था। अदानी की पेशकश में 6,005 करोड़ रुपये तुरंत चुकाने का प्रस्ताव शामिल है और बाकी रकम दो साल की अवधि में दी जाएगी। यही कारण था कि कर्जदाता अदानी के प्रस्ताव के पक्ष में आ गए। उनका मकसद था कि जितनी जल्दी और जितना ज्यादा पैसा रिकवर हो सके—और इस मानक पर अदानी का प्लान सबसे बेहतर साबित हुआ।

अब सवाल उठता है कि वेदांता की 16,700 करोड़ रुपये की बड़ी बोली आखिर क्यों खारिज हो गई? वजह साफ है—वेदांता की रिकवरी टाइमलाइन लंबी थी, लगभग पांच साल। बैंकों को इससे फायदा कम और इंतजार ज्यादा दिख रहा था, इसलिए उन्होंने तेजी से रिकवरी वाली अदानी बोली को प्राथमिकता दी।

इस पूरी प्रक्रिया को नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) संचालित कर रही है, जिसने SBI-led कंसोर्टियम से जेपी ग्रुप का कर्ज खरीदा है। अदानी की बोली ने जिंदल पावर, दालमिया भारत और PNC इंफ्राटेक जैसे दिग्गजों को भी पछाड़ दिया। दिलचस्प बात यह भी रही कि JAL के प्रमोटर मनोज गौड़ ने आखिरी समय में एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन उसे बाद में वापस लेना पड़ा।

अब पूरा मामला NCLT के पास जाएगा, जहां से मंजूरी मिलते ही यह भारत की सबसे बड़ी दिवालिया समाधान प्रक्रियाओं में से एक बन जाएगी। वहीं दूसरी तरफ बाजार अब इस उम्मीद में है कि अडानी के प्रवेश से जेपी ग्रुप की वित्तीय हालत स्थिर होगी और बिजनेस में नई ऊर्जा आएगी।

शेयर पिछले कुछ समय में काफी उतार-चढ़ाव के बाद अब अपने 52-सप्ताह के लो यानी 12.35 रुपये के मुकाबले काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों का विश्वास यह संकेत दे रहा है कि मजबूत प्रबंधन और बेहतर हैंडलिंग के साथ JP Power आगे नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है।

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