दुर्दांत नक्सली रहे हिड़मा की मौत के बाद तेलंगाना में 37 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें तीन स्टेट कमेटी मेंबर, तीन डिवीजनल व साइबर प्लाटून कमांडर, 9 एरिया कमेटी मेंबर और 22 पार्टी मेंबर शामिल हैं। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक के सामने इन नक्सलियों ने अपने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
इनमें 7 नक्सलियों (केएम डीएवीसी) ने 8 हथियारों समेत सरेंडर किया है। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने एक एके-47 राइफल, 2 एसएलआर, चार 303 राइफल व एक जी-3 राइफल समेत 346 जिंदा कारतूस भी तेलंगाना डीजीपी को सौंप दिए।
समर्पण करने वाले नक्सलियों में स्टेट कमेटी मेंबर कोय्याडा संबैया उर्फ आजाद, तकनीकी विभाग प्रभारी अप्पासी नारायण उर्फ रमेश, स्टेट कमेटी मेंबर मुचाकी सोमड़ा उर्फ एर्रा शामिल है। तीनों पर 20-20 लाख रुपए का ईनाम घोषित है।
इसके अलावा अन्य आत्मसमर्पित कैडर्स में एसीएम, डीवीसीएम, पीएलजीए बटालियन के सदस्य शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी रैंक के अनुसार ईनाम की राशि भी तेलंगाना सरकार ने दी। इसमें एसीएम को 20 लाख, डीएवीसीएम और सीवाईपीसीएम को 5 लाख, एसीएम और पीपीसीएम को 4 लाख, पार्टी मेंबर को 1 लाख रुपए दिए गए।
इसके अलावा हथियार जमा करने पर अतिरिक्त एके-47 के लिए 4 लाख, एसएलआर के लिए 2 लाख, 303 रायफल के लिए 1 लाख रुपए आत्मसमर्पित नक्सलियों को दिए गए। आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुल 1.41 लाख रुपए की राशि चेक व ड्राफ्ट के जरिए दी गई।
कर्रेगुट्टा 2.0 में घिरे, तो तेलंगाना भागे थे… 2025 में अब तक 465 नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर में सरेंडर कर चुके हैं। इधर, बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा में चलाए गए ऑपरेशन के बाद नक्सली घिर गए थे, जो किसी तरह तेलंगाना भाग निकले थे। तेलंगाना पहुंचकर अब वही नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
दरअसल जवानों के ऑपरेशन और घेराबंदी के कारण नक्सलियों की मूवमेंट नहीं हो पा रही है। वहीं उन पर जवानों की गोलियों का शिकार होने का भय भी बढ़ गया है। यही कारण है कि अब नक्सली अपनी जान बचाने आत्मसमर्पण कर रहे हैं।