भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग इस साल नए आयाम छू रही है। पहली बार ईवी रजिस्ट्रेशन 20 लाख यूनिट के पार पहुंच गया है—और दिलचस्प बात यह है कि साल खत्म होने में अभी एक महीना बाकी है। यह आंकड़ा सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत की ईवी यात्रा अब शुरुआती प्रयोगों से निकलकर एक मजबूत और परिपक्व बाजार की ओर बढ़ चुकी है। बैटरी तकनीक में सुधार, तेज चार्जिंग, आकर्षक मॉडल और सरकारी प्रोत्साहन, इन सभी ने मिलकर 2025 को ईवी ग्रोथ का बड़ा साल बना दिया है।
ताजा डेटा बताता है कि 2025 में अब तक 20.2 लाख ईवी (हाइब्रिड से अलग) रजिस्टर हो चुके हैं, जबकि 2024 में पूरे साल यह संख्या 19.5 लाख रही थी। यानी एक साल के भीतर ही देश की ईवी मांग ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। ईवी की लोकप्रियता इस साल भी लगातार बनी हुई है, भले ही नीतियों में बदलाव और सब्सिडी में कटौती जैसे उतार-चढ़ाव सामने आए हों।
इस तेजी के पीछे स्पष्ट कारण है—बैटरी कीमतों में कमी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार और ऐसे मॉडल्स की लॉन्चिंग जो ज्यादा रेंज और फास्ट-चार्जिंग तकनीक के साथ आते हैं। क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय का कहना है कि 2025 में ईवी उद्योग “मिड-टीन” यानी 15-16% की स्थिर वृद्धि बनाए रखेगा। यह पिछले साल की 27% ग्रोथ जितना तेज़ नहीं है, लेकिन मजबूत टू-व्हीलर मांग, 3W फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन और चार-पहिया सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसे मजबूती से आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा मोटर मैग्नेट की उपलब्धता में सुधार और बैटरी लागत में गिरावट ने उत्पादन लागत पर दबाव घटाया है।
सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का है, जो इस साल के कुल ईवी रजिस्ट्रेशन में 57% हिस्सेदारी रखते हैं। Vahan पोर्टल के अनुसार, 2025 में अब तक 11.6 लाख ई-स्कूटर और ई-बाइक बिक चुके हैं—जो 2024 के पूरे साल की बिक्री को भी पार कर चुके हैं। लंबे रेंज वाले मॉडल, किफायती कीमतें और मजबूत डीलर नेटवर्क ने स्थापित कंपनियों के ई-स्कूटर को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया है।
चार-पहिया ईवी—कारें और SUV—भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 2025 में इस सेगमेंट की बिक्री 1,56,455 यूनिट तक पहुंच चुकी है, जबकि 2024 में यह संख्या 99,429 थी—यानि 57% की छलांग। बेहतर रेंज, कम चलने की लागत और ज्यादा मॉडल विकल्पों ने शहरों के खरीदारों को ईवी की ओर तेजी से आकर्षित किया है। लंबी दूरी चार्जिंग की चुनौती अभी भी मौजूद है, लेकिन होम और ऑफिस चार्जिंग विकल्प और बढ़ते पब्लिक चार्जिंग स्टेशन इस कमी को तेजी से पूरा कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट भी स्थिर प्रदर्शन कर रहा है। 2025 में इस श्रेणी में 6.90 लाख यूनिट बिके, जो पिछले साल के लगभग बराबर हैं। फ्लीट ऑपरेटरों के लिए ई-रिक्शा और ई-ऑटो अब भी सबसे सस्ता और टिकाऊ विकल्प बने हुए हैं, इसलिए इस सेगमेंट की मांग हमेशा मजबूत रहती है।
20 लाख से ऊपर का रजिस्ट्रेशन यह साफ बताता है कि भारत की ईवी यात्रा अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है। अधिक विविध मॉडल, गिरती कीमतें, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क और घरेलू उत्पादन का तेजी से बढ़ना इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब कोई भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि भारत के परिवहन तंत्र का तेज गति से बढ़ता मुख्य हिस्सा बन चुकी है।
ईवी 2025 की यह सफलता सिर्फ बिक्री का रिकॉर्ड भर नहीं, बल्कि उस नई ऊर्जा का प्रतीक है जो भारत के भविष्य की सड़कें बदलने वाली है।