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लगातार तीसरे दिन बाजार में गिरावट—सेंसेक्स 250 अंक टूटा, निफ्टी 100 अंक लुढ़का; ऑटो-बैंकिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

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शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला बुधवार, 3 दिसंबर को भी जारी रहा। हफ्ते के तीसरे कारोबार दिन सेंसेक्स 250 अंक फिसलकर 84,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी 100 अंक टूटकर 25,930 पर आ गया। लगातार तीसरे सत्र की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयर लाल निशान में हैं। आज के शुरुआती कारोबार में ऑटो, बैंकिंग और FMCG सेक्टर दबाव में दिखे, जबकि IT, मेटल और फार्मा शेयरों में हल्की मजबूती बनी रही। बाजार की दिशा फिलहाल बंटे हुए संकेतों से तय हो रही है—कुछ सेक्टर संभल रहे हैं तो कुछ लगातार टूट रहे हैं।

एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला। कोरिया का कोस्पी 1.07% की बढ़त के साथ 4,037 पर पहुंचा, जापान का निक्केई भी 1.13% ऊपर 49,862 पर कारोबार करते हुए मजबूती दिखा रहा है। इसके उलट हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 1.02% गिरकर 25,828 पर फिसल गया। अमेरिकी बाजारों से भी हल्का सकारात्मक संकेत मिला—2 दिसंबर को डाउ जोन्स 0.39% ऊपर बंद हुआ, जबकि नैस्डेक 0.59% और S&P 500 0.25% की बढ़त के साथ बंद हुए।

घरेलू निवेशकों की ओर से बाजार को मजबूत समर्थन मिल रहा है। 2 दिसंबर को जहां विदेशी निवेशक (FIIs) कैश सेगमेंट में ₹3,642 करोड़ की बिकवाली कर गए, वहीं घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹4,645 करोड़ की जबरदस्त खरीदारी की। नवंबर महीने में भी यही रुझान रहा—FIIs ने ₹17,500 करोड़ के शेयर बेच डाले, जबकि DIIs ने ₹77,083 करोड़ की खरीद कर बाजार को सहारा दिया।

मंगलवार को भी बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 503 अंक टूटकर 85,138 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 143 अंक की गिरावट के साथ 26,032 पर आ गया। सेंसेक्स के 20 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई थी। हालांकि एशियन पेंट्स और मारुति के शेयर 3% तक चढ़े, लेकिन HDFC बैंक, ICICI बैंक और इंडिगो में 2% तक की गिरावट ने बाजार के दबाव को और बढ़ा दिया। NSE के फार्मा इंडेक्स में कल अच्छी खरीदारी दिखी, जबकि मीडिया, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर पर बिकवाली हावी रही।

लगातार तीन दिन की इस गिरावट ने बाजार की चाल को अनिश्चित बना दिया है। जहां वैश्विक संकेतों में मिश्रण है, वहीं घरेलू खरीदारी से अभी भी उम्मीदें बनी हुई हैं। निवेशक निगाहें अब आने वाले कारोबारी सत्रों और वैश्विक बाजारों के रुख पर टिकाए हुए हैं।

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