हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार का मिज़ाज शांत दिखाई दिया। सुबह की हलचल थमती गई और सेंसेक्स मामूली 30 अंकों की फिसलन के साथ 85,230 पर टिक गया। निफ्टी ने हालांकि हल्की-सी मजबूती दिखाई और 10 अंक चढ़कर 26,040 पर पहुंच गया। लेकिन इस सतह के नीचे बाजार का मूड उतना स्थिर नहीं रहा—सेंसेक्स के आधे से ज्यादा और निफ्टी के करीब आधे शेयर गिरावट की ओर झुके हुए नजर आए। मीडिया, मेटल और फार्मा शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल को धीमा रखा, जबकि ऑटो, IT और रियल्टी सेक्टर आज निवेशकों के पसंदीदा बने रहे।
एशियाई बाजारों में भी मिलाजुली तस्वीर देखने को मिली। कोरिया का कोस्पी मजबूती लेकर ऊपर था, वहीं जापान का निक्केई और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग दबाव में कारोबार कर रहे थे। वैश्विक संकेतों से भी कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिली—अमेरिकी बाजारों में डाउ जोन्स हल्की गिरावट में बंद हुआ जबकि नैस्डेक और S&P 500 ने छोटी बढ़त दर्ज की। विदेशी संकेतों की यह खींचतान घरेलू व्यापार की चाल में आज साफ झलकती रही।
इस बीच IPO बाजार में उत्साह देखने लायक है। मीशो का IPO तीसरे दिन में ही 8.28 गुना सब्सक्राइब हो चुका है और रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी ने इसे लगभग 10 गुना तक पहुंचा दिया। आज ही एक्स लिमिटेड और विद्या वायर्स में भी निवेश का मौका खुला हुआ है, जिससे नया निवेशक वर्ग सक्रिय दिख रहा है। वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशक लगातार चार दिनों से बाजार से पैसा निकाल रहे हैं—₹9,965 करोड़ की बिकवाली ने माहौल पर हल्का दबाव बनाया है। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर बाज़ार की नसों में स्थिरता बनाए हुए हैं। नवंबर में हुई भारी विदेशी बिकवाली के बाद दिसंबर की शुरुआत भी इसी रफ्तार से शुरू हुई लगती है।
भविष्य की ओर देखें तो ब्रोकरेज हाउस बैंक ऑफ अमेरिका ने निफ्टी के लिए 2026 का बड़ा लक्ष्य रखा है—29,000 का। यानी मौजूदा स्तर से लगभग 11% की वृद्धि की संभावना। उनका मानना है कि वैल्यूएशन में ज्यादा गुंजाइश नहीं, लेकिन आय वृद्धि बाजार को अगले दो सालों में आगे ले जाएगी।
गुरुवार का बाजार इसके मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत नजर आया था, जहां सेंसेक्स 159 अंक चढ़ा था और निफ्टी ने भी 48 अंकों की बढ़त दर्ज की थी। ऑटो, IT और रियल्टी शेयर तब भी तेजी के केंद्र में थे, जबकि मीडिया सेक्टर दबाव में आ चुका था।
आज का कारोबार इसलिए धीमा जरूर दिखा, लेकिन बाजार की दिशा का धागा टूट नहीं रहा। सेक्टर-टू-सेक्टर स्विचिंग, IPO की हलचल, विदेशी-घरेलू निवेशकों का खींचतान और वैश्विक संकेत—सब मिलकर बाज़ार को एक संतुलित लेकिन सतर्क मोड़ पर खड़ा कर रहे हैं।