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‘चेंदरू’ के नाम पर मिलेगा राज्य ग्रामीण पर्यटन सम्मान: बस्तर की पहचान बने इस ऐतिहासिक किरदार से जोडकर पर्यटन मंडल ने शुरू की नई पहल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर को दुनिया के नक्शे पर अलग पहचान देने वाले बालक चेंदरू का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। 1957 में अर्न आर्नहैम द्वारा बनाई गई प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री “चेंदुरू – द वर्ल्ड ऑफ अपू” (जिसे द जंगल सागा भी कहा जाता है) में दिखाई गई बाघ के शावक के साथ मासूम दोस्ती के कारण चेंदरू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे। अब छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इसी चेंदरू के नाम पर राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार देने का निर्णय लिया है।

इस पुरस्कार का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना, इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों या संस्थाओं को पहचान और प्रोत्साहन प्रदान करना तथा ग्रामीण स्तर पर पर्यटन की मजबूती में अहम भूमिका निभाने वालों को सम्मानित करना है।

पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया निर्णायक मंडल द्वारा की जाएगी, जिसमें ऐसे व्यक्तियों या संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने ग्रामीण पर्यटन में वर्षों तक सेवा की हो और अपने व्यक्तिगत अथवा सामुदायिक प्रयासों से क्षेत्र को मजबूत किया हो। प्रस्तावित व्यक्ति के योगदान के संबंध में प्रमाण-पत्र और ठोस साक्ष्यों को अनिवार्य बताया गया है, ताकि यह सम्मान सही मायने में उन हाथों तक पहुंचे जिन्होंने ग्रामीण पर्यटन को न केवल संवारने में योगदान दिया बल्कि उसकी पहचान भी बढ़ाई।

चेंदरू की विरासत को फिर मिली मान्यता
बस्तर निवासी चेंदरू का जीवन जंगल, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं से गहराई से जुड़ा था। उनकी कहानी सिर्फ एक लड़के और बाघ शावक की दोस्ती की कहानी नहीं थी, बल्कि बस्तर के मानव-प्रकृति संबंध का प्रतीक थी। इस डॉक्यूमेंट्री ने न केवल चेंदरू को दुनिया भर में प्रसिद्ध किया, बल्कि बस्तर की आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई।

कई दशकों बाद पर्यटन मंडल द्वारा चेंदरू की याद को फिर से जीवित करना, उस सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान है जिसने कभी बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर चमकाया था। यह पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को प्रेरित करेगा, साथ ही यह संदेश भी देगा कि छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और अनमोल विरासत को सम्मान देने में कभी पीछे नहीं रहता।

चेंदरू के नाम से जुड़ा यह सम्मान उस छोटे लड़के की कहानी को फिर से नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा, जिसने बस्तर की मिट्टी से निकलकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था।

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