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Census 2027: कैबिनेट की ऐतिहासिक मंजूरी, ₹11,718 करोड़ के बजट के साथ पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

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केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को लेकर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए इसके लिए ₹11,718.24 करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाली जनगणना न सिर्फ अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होगी, बल्कि तकनीक के लिहाज से भी एक नए दौर की शुरुआत करेगी। आज़ादी के बाद यह भारत की आठवीं और कुल मिलाकर 16वीं जनगणना होगी, जिसे पहली बार पूरी तरह डिजिटल रूप में अंजाम दिया जाएगा।

सरकार के मुताबिक इस बार जनगणना के लिए मोबाइल-बेस्ड एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। एन्यूमरेटर घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे, जिससे कागजी प्रक्रिया खत्म होगी और रियल-टाइम में सूचनाएं उपलब्ध होंगी। पूरे अभियान की निगरानी के लिए Census Management and Monitoring System यानी CMMS पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके जरिए केंद्र से लेकर राज्य और जिला स्तर तक प्रगति पर नजर रखी जा सकेगी। घरों की सूची तैयार करने के लिए वेब-बेस्ड HLB Creator का उपयोग होगा और नागरिकों को पहली बार Self-Enumeration का विकल्प भी मिलेगा, जिससे लोग खुद अपनी जानकारी सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर सकेंगे।

जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का होगा, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इस दौरान आवास की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं और घरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जिसे फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। हालांकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फीले क्षेत्रों में मौसम को ध्यान में रखते हुए यह चरण सितंबर 2026 में ही पूरा कर लिया जाएगा।

इस विशाल अभ्यास को जमीन पर उतारने के लिए देशभर में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इनमें से बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की होगी, जिन्हें एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर की जिम्मेदारी दी जाएगी। अपने नियमित काम के साथ-साथ उन्हें इस राष्ट्रीय दायित्व को निभाना होगा, जिससे प्रशासनिक मशीनरी की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

इस जनगणना की सबसे अहम और चर्चित विशेषता यह होगी कि पहली बार डिजिटल रूप में जाति आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स के 30 अप्रैल 2025 के फैसले के अनुरूप, Population Enumeration चरण के दौरान जाति गणना पूरी तरह डिजिटल फॉर्मेट में की जाएगी। इससे सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़ों का एक सटीक और अपडेटेड डेटाबेस तैयार होने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि जनगणना 2027 के जरिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। करीब 18,600 तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति लगभग 550 दिनों के लिए की जाएगी, जिससे कुल मिलाकर 1.02 करोड़ मैन-डे का रोजगार सृजित होगा। इसके साथ ही युवाओं में डेटा मॉनिटरिंग, डिजिटल टूल्स और तकनीकी कार्यों का व्यावहारिक अनुभव भी बढ़ेगा।

इस बार जनगणना के नतीजों को भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से जारी करने की तैयारी है। उन्नत डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स की मदद से गांव और वार्ड स्तर तक आंकड़ों की आसान पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। Census-as-a-Service मॉडल के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को मशीन-रीडेबल डेटा सीधे उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकेगी।

कुल मिलाकर जनगणना 2027 सिर्फ आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि यह देश की आवास स्थितियों, बुनियादी सुविधाओं, भाषा, धर्म, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक ढांचे से जुड़े हर पहलू का सबसे व्यापक और विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। सरकार के इस फैसले को भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़े तकनीकी और नीतिगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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