इलॉन मस्क की स्पेसएक्स ने निजी कंपनियों की दुनिया में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए अपनी वैल्यूएशन 800 बिलियन डॉलर तय कर दी है। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर ब्रेट जॉनसन ने शेयरहोल्डर्स को भेजे गए मेमो में यह जानकारी साझा की, जिसमें लेटेस्ट सेकेंडरी ऑफरिंग के तहत शेयर प्राइस 421 डॉलर प्रति शेयर निर्धारित किए जाने की पुष्टि की गई। इसके साथ ही स्पेसएक्स ने 2026 में IPO लाने की योजना को भी कंफर्म कर दिया है, जिससे कंपनी के पब्लिक मार्केट में उतरने का रास्ता औपचारिक रूप से खुल गया है।
यह उछाल बीते कुछ महीनों में अभूतपूर्व रहा है। जुलाई में जहां स्पेसएक्स की वैल्यूएशन 400 बिलियन डॉलर थी और शेयर प्राइस 212 डॉलर पर था, वहीं अब महज कुछ समय में वैल्यूएशन दोगुनी होकर 800 बिलियन डॉलर, यानी करीब 72.44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। नई सेकेंडरी ऑफरिंग में तय किया गया 421 डॉलर का शेयर प्राइस इस तेजी का साफ संकेत देता है। यह सेकेंडरी सेल है, जिसमें कंपनी के कर्मचारी और मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेच सकते हैं। इस डील के साथ स्पेसएक्स दुनिया की सबसे ज्यादा वैल्यूएबल प्राइवेट कंपनी बन चुकी है।
स्पेसएक्स की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण स्टारलिंक माना जा रहा है। लो-अर्थ ऑर्बिट में तैनात हजारों सैटेलाइट्स के जरिए स्टारलिंक दुनिया के दूर-दराज और मुश्किल इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा रही है। लाखों ग्राहक पहले ही इस सेवा से जुड़ चुके हैं और स्टारलिंक अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है। इसके साथ ही स्पेसएक्स का रॉकेट लॉन्च बिजनेस और स्टारशिप जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स निवेशकों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
CFO ब्रेट जॉनसन ने अपने मेमो में शेयरहोल्डर्स को यह स्पष्ट किया कि नई वैल्यूएशन और शेयर प्राइस कंपनी की मौजूदा ग्रोथ और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाते हैं। मेमो में IPO की योजना का भी जिक्र किया गया है, हालांकि उससे जुड़ी विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा नहीं की गई है। इतना जरूर साफ है कि कंपनी अब पब्लिक लिस्टिंग की दिशा में ठोस तैयारी कर रही है।
स्पेसएक्स द्वारा 2026 में IPO लाने की पुष्टि को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इलॉन मस्क पहले यह संकेत दे चुके थे कि स्टारलिंक का रेवेन्यू स्थिर होने के बाद ही कंपनी पब्लिक मार्केट में जाएगी। मौजूदा हालात में स्टारलिंक तेजी से ग्रोथ फेज में है, जिससे IPO का आधार मजबूत होता दिख रहा है। IPO के जरिए जुटाया गया फंड स्टारशिप जैसे बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा, जिनका सीधा संबंध भविष्य के स्पेस मिशनों, यहां तक कि मंगल अभियान से भी है।
अगर बीते वर्षों पर नजर डालें तो स्पेसएक्स की वैल्यूएशन में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2024 में यह करीब 350 बिलियन डॉलर के आसपास थी, जुलाई 2025 में 400 बिलियन डॉलर तक पहुंची और अब कुछ ही महीनों में 800 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छू लिया है। चूंकि स्पेसएक्स अभी एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए इसकी वैल्यूएशन सार्वजनिक शेयर बाजार के बजाय टेंडर ऑफर्स और सेकेंडरी सेल्स के जरिए तय होती है।
आगे की रणनीति में कंपनी का फोकस साफ नजर आता है। IPO के बाद स्पेसएक्स एक पब्लिक कंपनी बन जाएगी, जिससे ज्यादा निवेशकों को इसमें हिस्सेदारी का मौका मिलेगा। साथ ही स्टारशिप के डेवलपमेंट को और तेज किया जाएगा, जो डीप-स्पेस मिशनों के लिए अहम है। स्टारलिंक का वैश्विक विस्तार भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसमें डायरेक्ट-टू-सेल सैटेलाइट इंटरनेट जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सभी कदमों के साथ स्पेसएक्स न सिर्फ अंतरिक्ष उद्योग में, बल्कि ग्लोबल टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी अपनी पकड़ और मजबूत करने की ओर बढ़ रही है।