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एसआईआर की सख़्त पड़ताल: 27.5 लाख नाम सत्यापित नहीं, 5 लाख लापता और 6.40 लाख मतदाताओं की मौत

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में राज्य की मतदाता सूची की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। कुल दो करोड़ बारह लाख से अधिक मतदाताओं के पुनरीक्षण के दौरान 27 लाख 50 हजार 822 नाम ऐसे पाए गए, जिनका सत्यापन नहीं हो सका। जांच में यह भी सामने आया कि 14 लाख 26 हजार 212 मतदाता दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, 1 लाख 71 हजार 212 नाम डुप्लिकेट निकले, करीब 4 लाख 98 हजार 291 मतदाता लापता दर्ज हुए और 6 लाख 40 हजार 115 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। पुनरीक्षण के दौरान मृत पाए गए मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देशों के अनुसार मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन 23 दिसंबर को किया जाएगा। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद 22 जनवरी तक दावा और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिन पर 14 फरवरी तक सुनवाई होगी। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। हाउस सर्वे का कार्य 4 नवंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर को समाप्त हुआ, जबकि 23 दिसंबर को गणनावाली मतदाता सूची जारी की जानी है। आयोग के नियमों के तहत प्राप्त दावों और आपत्तियों की विधिवत जांच के बाद ईआरओ निर्णय लेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सुनवाई के बाद आदेश पारित किया जाएगा। अपील की व्यवस्था भी नियमों के अंतर्गत उपलब्ध रहेगी।

मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा सकती हैं। वोटर पोर्टल या ईसीनेट मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प दिया गया है, वहीं बीएलओ के पास ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। जिनका नाम प्रारूप सूची में नहीं जुड़ा है, वे फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने का आवेदन कर सकते हैं। गलती से नाम दर्ज हो जाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 और प्रविष्टियों में संशोधन के लिए फॉर्म-8 का प्रावधान रखा गया है।

निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, यदि किसी मतदाता के पुराने एसआईआर विवरण डेटाबेस से मेल नहीं खाते, तो मतदाता पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी करेंगे। नोटिस मिलने पर मतदाता को जन्म तिथि और जन्म स्थान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें जन्म तिथि और स्थान का प्रमाण देना होगा। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को आयोग की सूची में शामिल किसी भी वैध दस्तावेज से अपनी जानकारी प्रमाणित करनी होगी, जबकि 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं के लिए भी निर्धारित दस्तावेजों के जरिए जन्म तिथि और स्थान का प्रमाण देना अनिवार्य होगा।

कुल मिलाकर, विशेष गहन पुनरीक्षण ने राज्य की मतदाता सूची में बड़ी विसंगतियों को उजागर किया है। आने वाले महीनों में दावे-आपत्तियों और अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया तय करेगी कि मतदाता सूची कितनी शुद्ध और अद्यतन हो पाती है।

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