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स्कूलों में एआई शिक्षा की बड़ी तैयारी: 11वीं–12वीं के लिए किताबें बनाएगा एनसीईआरटी, 2026–27 से कक्षा 3 से होगी शुरुआत

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देश की स्कूली शिक्षा को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। NCERT ने कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने के लिए विशेष टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम गठित की है। शिक्षा मंत्रालय ने संसद में इसकी जानकारी देते हुए साफ किया कि यह पहल National Education Policy 2020 के तहत स्कूल शिक्षा में एआई को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

मंत्रालय के अनुसार, सीनियर सेकेंडरी स्तर के लिए तैयार किया जा रहा यह एआई पाठ्यक्रम NCF-SE 2023 के अनुरूप होगा, ताकि छात्रों को नई तकनीकों की समझ के साथ भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि स्कूल स्तर पर ही बच्चों में तकनीक आधारित सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित हो।

इसी दिशा में एनसीईआरटी ने पहले ही कक्षा 6 की व्यावसायिक शिक्षा की किताब में एक तकनीक आधारित प्रोजेक्ट शामिल किया है, जिसमें एनिमेशन और गेम्स के जरिए एआई टूल्स के इस्तेमाल को समझाया गया है। इसका मकसद यह है कि छात्र शुरुआती कक्षाओं से ही डिजिटल और एआई सोच से परिचित हो सकें।

केंद्र सरकार ने यह भी दोहराया है कि 2026–27 के शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ही सभी स्कूलों में एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। यह फैसला पूरी तरह से एनईपी 2020 के सुधारों के अनुरूप है, जिसमें तकनीक को शिक्षा का मूल आधार बनाने पर जोर दिया गया है।

इससे पहले CBSE कक्षा 3 से 12 तक के लिए एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर आधारित ड्राफ्ट करिकुलम तैयार कर चुका है। शुरुआती कक्षाओं में एआई की बुनियादी समझ दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 और 10 में इसे अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाने की योजना है। इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और करियर के लिए मजबूत आधार मिल सकेगा।

एआई शिक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने SOAR यानी स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस नामक राष्ट्रीय कार्यक्रम भी शुरू किया है। यह पहल एनईपी 2020, राष्ट्रीय एआई स्किलिंग फ्रेमवर्क और विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ी है। इसका उद्देश्य छात्रों में एआई को लेकर जागरूकता बढ़ाना, शिक्षकों की एआई साक्षरता को मजबूत करना और डिजिटल डिवाइड को कम करना है।

SOAR कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को National Skills Qualification Framework से जुड़े चार चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें ‘AI to be Aware’, ‘AI to Acquire’ और ‘AI to Aspire’ जैसे माइक्रो-क्रेडेंशियल शामिल होंगे। प्रत्येक मॉड्यूल 15 घंटे का होगा और कुल मिलाकर छात्रों को 45 घंटे की संरचित एआई लर्निंग मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन पहलों से स्कूली शिक्षा अधिक समावेशी, तकनीक-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बन सकेगी।

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