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रायपुर में कमिश्नर पुलिसिंग प्रणाली 23 जनवरी से: साय कैबिनेट के फैसलों से राजधानी समेत पूरे प्रदेश को बड़ी सौगात

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रायपुर में कानून-व्यवस्था को नई दिशा देने वाला फैसला लेते हुए साय कैबिनेट ने राजधानी में कमिश्नर पुलिसिंग प्रणाली लागू करने पर अंतिम मुहर लगा दी है। बुधवार 31 दिसंबर को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में तय किया गया कि रायपुर महानगरीय क्षेत्र में 23 जनवरी 2026 से पुलिस आयुक्त प्रणाली प्रभावी हो जाएगी। इस फैसले को राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी, शहरी अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के मद्देनज़र एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि जनवरी माह में राजधानी रायपुर में ऑटो एक्सपो का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वाहन खरीदने वालों को लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की बड़ी राहत दी जाएगी। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी यानी OSD का पद एक वर्ष की अवधि के लिए सृजित करने का निर्णय भी लिया गया है, ताकि प्रशासनिक समन्वय और निगरानी को और मजबूत किया जा सके।

बैठक में वन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम फैसले भी लिए गए। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से वर्ष 2026 के लिए 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता खरीदने के लिए राज्य शासन की गारंटी पर ऋण लेने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाजों की खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसी कड़ी में अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए संघ को एक बार के लिए 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने की स्वीकृति भी दी गई।

वित्तीय बोझ कम करने की दिशा में भी साय कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की गारंटी पर लिए गए ऋणों के मामले में 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए कर्ज की पूरी राशि चुकाने का फैसला लिया गया है। इससे न केवल हर साल करीब 2.40 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान से मुक्ति मिलेगी, बल्कि 229.91 करोड़ रुपये की लंबित सरकारी गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी।

धान और चावल मिलिंग से जुड़े मिलर्स को राहत देते हुए उसना मिलिंग पर प्रोत्साहन राशि 20 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। साथ ही अब प्रोत्साहन राशि की पात्रता के लिए न्यूनतम मिलिंग अवधि को तीन माह से घटाकर दो माह कर दिया गया है। औद्योगिक क्षेत्र को गति देने के लिए औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में भी संशोधन का निर्णय लिया गया है, जिससे निवेश की गुणवत्ता बढ़ेगी, स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होंगे और नीति के क्रियान्वयन में आ रही विसंगतियां दूर होंगी।

राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक आयोजित होने वाले 9वें ऑटो एक्सपो को लेकर भी कैबिनेट ने बड़ा ऐलान किया है। इस दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं और खरीदारों को मिलेगा। इसके अलावा कस्टम मिलिंग के लिए धान उपार्जन और परिवहन से संबंधित गतिविधियों में राइस मिलर्स द्वारा दी जाने वाली बैंक गारंटी पर स्टाम्प शुल्क को 0.25 प्रतिशत से घटाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है।

कुल मिलाकर, साय कैबिनेट की यह बैठक राजधानी रायपुर के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रशासनिक, आर्थिक और विकासात्मक दृष्टि से बेहद अहम साबित हुई है। कमिश्नर पुलिसिंग प्रणाली से लेकर टैक्स में राहत, किसानों और संग्राहकों को समर्थन तथा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाले ये फैसले नए साल की शुरुआत से पहले सरकार की स्पष्ट प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।

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