शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने इतिहास रच दिया। मजबूत वैश्विक संकेतों, बड़े शेयरों में आक्रामक खरीदारी और घरेलू निवेशकों के भरोसे के दम पर बाजार ने नया शिखर छू लिया। कारोबार के अंत में निफ्टी 50 182 अंकों की बढ़त के साथ 26,328.55 के ऑल-टाइम हाई पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 573.41 अंक चढ़कर 85,762.01 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे की भी कहानी कहती है।
दिनभर बाजार में चौतरफा मजबूती दिखी। निफ्टी 50 में हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे शेयरों ने करीब 2% तक की छलांग लगाई, वहीं आईटीसी और बजाज ऑटो में मुनाफावसूली के चलते गिरावट रही। मार्केट ब्रेड्थ साफ तौर पर सकारात्मक रहा—तेजी वाले शेयरों की संख्या गिरावट वालों से काफी ज्यादा रही, जो रैली की मजबूती को दर्शाता है।
इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा सहारा वैश्विक बाजारों से मिला। एशिया में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग हरे निशान में रहे, जबकि अमेरिकी फ्यूचर्स भी मजबूत दिखे। इससे वॉल स्ट्रीट में अच्छी शुरुआत के संकेत मिले और भारतीय बाजारों का सेंटीमेंट और मजबूत हुआ।
घरेलू मोर्चे पर लार्ज-कैप शेयरों में लगातार खरीदारी ने रैली को पंख दिए। रिलायंस इंडस्ट्रीज दूसरे दिन भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। दिसंबर तिमाही के नतीजों को लेकर उम्मीदें बढ़ीं—खासकर ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री आंकड़ों और कंपनियों के बिजनेस अपडेट्स ने भरोसा जगाया। इसी कारण निफ्टी ऑटो इंडेक्स लगातार चौथे सत्र में चढ़ा।
बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों का ठोस सहारा मिला। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद डीआईआई की लगातार खरीदारी ने गिरावट को थामे रखा और सूचकांकों को रिकॉर्ड तक पहुंचाया। साथ ही रुपये में आई मजबूती—डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की बढ़त—ने भी धारणा को बल दिया। फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि आरबीआई 90 के स्तर के आसपास रुपये को सपोर्ट दे रहा है, जिससे जोखिम लेने की भूख बढ़ी।
कुल मिलाकर, वैश्विक संकेतों की मजबूती, लार्ज-कैप्स में खरीदारी, घरेलू निवेशकों का भरोसा, रुपये का सहारा और ऑटो सेक्टर की चमक—इन सबने मिलकर बाजार को नए रिकॉर्ड तक पहुंचाया। आगे भी अच्छे तिमाही नतीजे, नीतिगत सुधारों पर फोकस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक घटनाक्रम बाजार की रफ्तार को बनाए रख सकते हैं।