न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम में मोहम्मद शमी का नाम न होना क्रिकेट जगत में तीखी बहस का कारण बन गया है। चयनकर्ताओं ने अनुभव से ज्यादा युवाओं पर भरोसा जताते हुए तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा को सौंप दी। लेकिन इस फैसले ने शमी के बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी को खासा नाराज कर दिया है, जिन्होंने सीधे चयन समिति और उसके चेयरमैन अजीत अगरकर पर सवाल खड़े कर दिए।
टीम के ऐलान के बाद कोच की पीड़ा साफ झलकी। उनका कहना था कि एक खिलाड़ी आखिर और क्या करे—कितने विकेट ले? उनके मुताबिक शमी का प्रदर्शन खुद उनकी वकालत करता है, फिर भी उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। घरेलू क्रिकेट में शमी की गेंदबाजी धारदार रही है। विजय हजारे ट्रॉफी में पांच मैचों में 11 विकेट, असम के खिलाफ बंगाल की ओर से 3/55 का स्पेल—इन प्रदर्शनों ने उनकी लय और फिटनेस दोनों साबित की हैं। इसके बावजूद वनडे टीम से बाहर रहना कई सवाल छोड़ जाता है।
कोच का मानना है कि चयनकर्ता 35 वर्षीय शमी से आगे बढ़ने का मन बना चुके हैं। उनके शब्दों में, यह संकेत साफ है कि वे शमी को अब वनडे योजनाओं में नहीं देखना चाहते, जबकि आंकड़े बताते हैं कि शमी के पास अभी भी बहुत कुछ देने को है। पूरे सीजन में अलग-अलग फॉर्मेट मिलाकर 16 मैचों में 47 विकेट—रणजी ट्रॉफी में 20, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 16 और विजय हजारे ट्रॉफी में 11 विकेट—किसी भी तेज गेंदबाज की मजबूती के लिए पर्याप्त हैं। इसके बावजूद मार्च 2025 के बाद से शमी भारत के लिए वनडे नहीं खेल पाए हैं; उन्होंने आखिरी बार चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भारतीय जर्सी पहनी थी।
न्यूजीलैंड सीरीज के लिए चुनी गई वनडे टीम भविष्य की तैयारी का संकेत देती है, जहां युवाओं को तरजीह दी जा रही है। मगर लगातार प्रदर्शन करने वाले अनुभवी गेंदबाज को बाहर रखना क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों के बीच बहस को और तेज कर रहा है। सवाल वही है—जब विकेट बोल रहे हों, तो चयन में खामोशी क्यों?