बस्तर नक्सल नेटवर्क के लिए यह घटनाक्रम किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा। माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी और बटालियन नंबर-1 का कमांडर इन चीफ देवा बारसे ने शनिवार को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आत्मसमर्पण कर दिया। 49 वर्षीय देवा अपने साथ 19 सहयोगियों, करीब 48 हथियारों और 20 लाख 30 हजार रुपये नकद लेकर तेलंगाना पहुंचा था। 3 जनवरी को उसे औपचारिक रूप से पुलिस महानिदेशक के समक्ष सरेंडर कराया गया, जिसे सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं।
देवा बारसे का सरेंडर इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह अत्याधुनिक विदेशी हथियारों से लैस था। उसके पास इजराइल में निर्मित तावोर असॉल्ट राइफल और अमेरिका में बनी कॉल्ट M4 राइफल बरामद की गई हैं। दावा किया जा रहा है कि बटालियन स्तर के नक्सली दस्ते से पहली बार इस तरह की विदेशी राइफलें हाथ लगी हैं। आमतौर पर भारत में तावोर राइफल भारतीय सेना, CRPF और कोबरा जैसे विशेष बलों के पास होती है और इसे AK-47 से अधिक सटीक माना जाता है, जबकि कॉल्ट M4 भारतीय सुरक्षा बलों में बेहद सीमित संख्या में ही देखी जाती है। इन हथियारों की मौजूदगी नक्सलियों के अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क की ओर भी इशारा कर रही है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, हिड़मा के एनकाउंटर के बाद देवा नवंबर 2025 में ही संगठन छोड़ने का मन बना चुका था। उसने सरेंडर का संदेश भी भिजवाया था। इसी क्रम में सुकमा जिले में ग्रीन-कॉरिडोर बनाया गया और कुछ दिनों के लिए ऑपरेशन भी रोका गया, ताकि सुरक्षित आत्मसमर्पण संभव हो सके। हालांकि देवा ने बस्तर में सरेंडर करने के बजाय सीधे तेलंगाना का रास्ता चुना और 1 जनवरी को मुलुगु जिले के रास्ते हैदराबाद पहुंच गया।
देवा बारसे का नाम नक्सल इतिहास में इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह 2013 के झीरम घाटी हमले से जुड़े दरभा डिवीजन का सचिव रह चुका है। उसी हमले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाया गया था। साल 2023 में हिड़मा ने उसे बटालियन नंबर-1 का प्रमुख बनाया था। अब उसके सरेंडर के बाद पूछताछ में झीरम हमले से जुड़े कई बड़े राज सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
तेलंगाना के डीजीपी ने इस आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता बताया है। उन्होंने शेष नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। देवा पर तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र—तीनों राज्यों में कुल 75 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उसकी गिरफ्तारी या सरेंडर की अहमियत और बढ़ जाती है।
फिलहाल बस्तर क्षेत्र में करीब 200 से 300 हथियारबंद नक्सली ही बचे होने का अनुमान है। महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ (MMC) जोन लगभग समाप्त हो चुका है, जबकि उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। अब सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगले 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना है। माना जा रहा है कि यदि इस अवधि में 5–6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या आत्मसमर्पण करते हैं, तो बस्तर फ्रंट लाइन के शीर्ष नक्सली नेतृत्व का अंत तय माना जाएगा।
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