
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी ने कई अहम राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों का ऐलान किया है, ताकि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया समय रहते मजबूत और संतुलित तरीके से पूरी की जा सके। इस फैसले में छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें तमिलनाडु और पुडुचेरी की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है, जिसे पार्टी के भीतर एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है।
दरअसल, साल 2026 में तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को कांग्रेस बेहद अहम मान रही है, क्योंकि यहीं से पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी काफी हद तक तय होगी। इसी कारण कांग्रेस ने अभी से उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन इसी सोच का हिस्सा है, ताकि टिकट बंटवारे में अनुभव, सामाजिक समीकरण और जमीनी मजबूती को प्राथमिकता दी जा सके।
तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों की जिम्मेदारी टीएस सिंहदेव को सौंपना कांग्रेस के भरोसे को दर्शाता है। स्क्रीनिंग कमेटी का मुख्य काम संभावित उम्मीदवारों के दावों की बारीकी से समीक्षा करना, उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक भूमिका का आकलन करना और फिर पार्टी नेतृत्व को नामों की सिफारिश करना होता है। ऐसे में यह भूमिका सीधे तौर पर चुनावी रणनीति से जुड़ी मानी जाती है।
इसी सूची में कांग्रेस ने असम के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। पार्टी महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को असम की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। इस फैसले की आधिकारिक जानकारी कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए साझा की। उन्होंने बताया कि यह नियुक्ति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी से की गई है।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं की अगुआई में गठित ये स्क्रीनिंग कमेटियां उम्मीदवार चयन को ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनाएंगी। पार्टी का फोकस साफ है कि आगामी विधानसभा चुनावों में संगठनात्मक मजबूती के साथ मैदान में उतरा जाए और टिकट वितरण को लेकर किसी तरह की असंतोषजनक स्थिति न बनने दी जाए। तमिलनाडु–पुडुचेरी से लेकर असम तक, इन नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने यह संकेत दे दिया है कि वह 2026 की चुनावी लड़ाई को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
