छत्तीसगढ़ के Balodabazar जिले में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सोनाखान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बागार में देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रिहायशी इलाके से सटे खेत में तेंदुए ने एक हिरण का शिकार कर लिया। यह घटना रात करीब एक से दो बजे के बीच की बताई जा रही है, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। सुबह जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना अनिल चौहान के घर के पास स्थित इंद्रकुमार शर्मा के खेत में हुई, जहां तेंदुए ने हिरण पर अचानक हमला कर उसे मार डाला। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। प्रशिक्षु आरएफओ और सहायक परिक्षेत्र अधिकारी कोसमसारा आस्था यादव को मामले से अवगत कराया गया, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, निरीक्षण किया गया और पंचनामा तैयार कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
तेंदुए की रिहायशी इलाके में मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इसे देखते हुए सहायक परिक्षेत्र अधिकारी आस्था यादव और परिसर रक्षी बोरसी युधिष्ठिर डडसेना ने ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि शाम होते ही घरों में रहें, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और किसी भी जंगली जानवर के संपर्क में आने से बचें। साथ ही वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगली जीवों को नुकसान न पहुंचाया जाए, क्योंकि इससे खतरा और बढ़ सकता है।
इसी बीच, तेंदुए के हमलों से जुड़ी एक और सनसनीखेज घटना ने इलाके की चिंता और बढ़ा दी है। 30 दिसंबर को Dongargarh क्षेत्र से सामने आए एक मामले में जंगल में नीम की लकड़ी तोड़ने गए एक ग्रामीण पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। ग्राम लोझरी निवासी केज़उ राम कंवर पर हुए इस हमले में उसके सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ ले जाया गया और हालत गंभीर होने पर राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद गांवों में डर का माहौल है। लोग जंगल की ओर जाने से कतरा रहे हैं और वन विभाग से सुरक्षा व्यवस्था और गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय पुलिस को पूरे मामले की सूचना दे दी गई है। आशंका जताई जा रही है कि तेंदुआ जंगल से भटककर रिहायशी क्षेत्रों की ओर आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।