सोने-चांदी की चमक और तेज: सोना ₹1.36 लाख के करीब, चांदी ₹2.37 लाख किलो—निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी

Spread the love

नए साल की शुरुआत के साथ ही कीमती धातुओं ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। 5 जनवरी को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा। India Bullion and Jewellers Association के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर 939 रुपये चढ़कर 1,35,721 रुपये पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत 2,225 रुपये बढ़कर 2,36,775 रुपये प्रति किलो हो गई। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को दोनों धातुएं अपने ऑल टाइम हाई को छू चुकी थीं, जिससे बाजार में यह संकेत मिल रहा है कि लंबी अवधि की तेजी अब भी बरकरार है।

कैरेट के हिसाब से देखें तो सोने के दाम हर श्रेणी में ऊपर बने हुए हैं। 24 कैरेट सोना 1.35 लाख रुपये के पार है, 22 कैरेट करीब 1.24 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा है, जबकि 18 और 14 कैरेट गोल्ड भी मजबूत स्तरों पर टिके हैं। बड़े शहरों की बात करें तो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ और रायपुर जैसे प्रमुख बाजारों में 24 कैरेट सोना लगभग 1.37 से 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में बिक रहा है। शहरों के रेट अलग-अलग इसलिए रहते हैं क्योंकि इनमें 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन जुड़ जाता है, जबकि IBJA के भाव इन सबके बिना तय होते हैं। इन्हीं दरों का इस्तेमाल Reserve Bank of India सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन की कीमत तय करने में करते हैं।

बीते 10 दिनों की चाल देखें तो सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव के बावजूद ट्रेंड ऊपर की ओर ही रहा है। दिसंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर जनवरी की शुरुआत तक बाजार में छुट्टियों के बावजूद खरीदारी का माहौल बना रहा, जिसने दामों को सहारा दिया। पूरे 2025 की तस्वीर देखें तो सोने ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। बीते साल 24 कैरेट सोना करीब 75 प्रतिशत महंगा हुआ, वहीं चांदी ने तो 167 प्रतिशत की छलांग लगाकर सभी को चौंका दिया। यही वजह है कि दोनों धातुएं अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि मजबूत निवेश विकल्प के तौर पर देखी जा रही हैं।

सोने में जारी तेजी के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं। अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे सोने की होल्डिंग कॉस्ट घटी और खरीदारी बढ़ी। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की ओर मोड़ा, जिसमें सोना पहली पसंद बना। इसके अलावा चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में बड़े पैमाने पर सोना जोड़ रहे हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव और कीमतों पर असर दिख रहा है।

चांदी की तेजी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बढ़ते इस्तेमाल ने इसे एक अहम औद्योगिक धातु बना दिया है। इसके साथ ही अमेरिका में टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कंपनियां चांदी का स्टॉक पहले से जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई तंग हुई और दाम ऊपर चढ़े। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी रुकावट के डर से अग्रिम खरीदारी हो रही है, जो आने वाले महीनों में कीमतों को और सहारा दे सकती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तेजी अभी थमने वाली नहीं है। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर Ajay Kedia के मुताबिक चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है और साल के दौरान यह 2.75 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। वहीं सोने की बात करें तो अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो साल के आखिर तक 10 ग्राम सोना 1.50 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की चमक और तेज होने की पूरी संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *