रिलायंस के शेयर 5% धड़ाम: एक झटके में ₹1 लाख करोड़ साफ, जून 2024 के बाद सबसे बड़ा एक-दिनी झटका क्यों लगा?

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मुंबई शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों को बड़ा झटका लगा, जब Reliance Industries Limited के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इंट्राडे कारोबार में रिलायंस के शेयर करीब 5 प्रतिशत टूटकर ₹1,497.05 तक फिसल गए। यह जून 2024 के बाद एक ही दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। गिरावट इतनी तेज थी कि कुछ ही घंटों में कंपनी का लगभग ₹1 लाख करोड़ का मार्केट कैप मिट गया। आम निवेशकों के लिए यह इसलिए भी चौंकाने वाला रहा, क्योंकि रिलायंस को अब तक एक मजबूत और स्थिर ब्लू-चिप शेयर के तौर पर देखा जाता रहा है।

इस गिरावट की जड़ में कोई कमजोर तिमाही नतीजा नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट को लेकर उपजा विवाद रहा। दरअसल, Bloomberg की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूसी कच्चे तेल से लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। यह खबर सामने आते ही बाजार में हलचल मच गई। इसके जवाब में रिलायंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तुरंत सफाई देते हुए कहा कि उसकी जामनगर रिफाइनरी को पिछले तीन हफ्तों में रूसी कच्चा तेल नहीं मिला है और जनवरी में भी ऐसी किसी डिलीवरी की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया।

हालांकि रिलायंस की ओर से खंडन के बावजूद बाजार ने इस खबर को हल्के में नहीं लिया। निवेशकों को यह चिंता सताने लगी कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय और संवेदनशील खबरें कंपनी की छवि और वैश्विक कारोबार पर असर डाल सकती हैं। इसी आशंका में बड़े संस्थागत निवेशकों की बिकवाली शुरू हो गई, जिससे शेयर अपने 50-दिवसीय मूविंग एवरेज से भी नीचे फिसल गया।

इस बिकवाली का असर सिर्फ रिलायंस तक सीमित नहीं रहा। रिलायंस निफ्टी-50 इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाला शेयर बन गया और अकेले इसके कारण निफ्टी में करीब 82 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार की नजर इस बात पर भी गई कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लंबे समय तक रियायती रूसी तेल का बड़ा खरीदार रहने वाली रिलायंस ने अब ऐसे तेल की खरीद रोक दी है।

रिलायंस द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने से जनवरी में भारत का रूस से तेल आयात और घटने की आशंका जताई जा रही है। पहले ही अमेरिकी और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिबंधों के चलते दिसंबर में रूस से भारत का तेल आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका था। ऐसे में किसी भी तरह की नई खबर बाजार की संवेदनशील नस को छू जाती है।

कुल मिलाकर, रिलायंस के शेयरों में आई यह तेज गिरावट एक बार फिर यह याद दिलाती है कि शेयर बाजार सिर्फ मुनाफे और बैलेंस शीट नहीं देखता। खबरें, छवि और वैश्विक घटनाक्रम भी निवेशकों की धारणा को पल भर में बदल सकते हैं। भले ही कंपनी ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया हो, लेकिन अनिश्चितता और डर ने फिलहाल शेयर पर भारी दबाव बना दिया है। यह घटना निवेशकों के लिए एक सीख भी है कि बड़े और मजबूत माने जाने वाले शेयरों में भी अल्पकाल में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।

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