छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दुधली गांव में 9 जनवरी से शुरू होने जा रही राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर सियासी बयानबाजी और अंदरूनी खींचतान भले ही सुर्खियों में रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। तमाम अटकलों और विवादों के बीच जंबूरी स्थल पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और हजारों स्काउट-गाइड कैडेट्स की मौजूदगी ने आयोजन को जीवंत बना दिया है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर Bharat Scouts and Guides ने साफ किया है कि आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा और किसी भी तरह के स्थगन की खबरें निराधार हैं।
आयोजन से पहले राजनीतिक हलचल जरूर तेज हुई, लेकिन संगठन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट रुख अपनाया। राज्य आयुक्त की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह जंबूरी स्काउटिंग-गाइडिंग की प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से जुड़ा अहम कार्यक्रम है, जिसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जाएगा। संगठन का दावा है कि सियासी बवंडर के बावजूद प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर समन्वय बना हुआ है।
जंबूरी स्थल पर मौजूद ग्राउंड रिपोर्ट भी इसी तस्वीर की पुष्टि करती है। दुधली में बड़े पैमाने पर कैंपिंग एरिया, सुरक्षा इंतजाम, चिकित्सा सुविधाएं, मंच और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे युवा स्काउट्स और रेंजर्स में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बातचीत में प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें किसी तरह की अव्यवस्था नहीं दिखी और आयोजन पूरी तरह सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक इस समय देशभर से 5 हजार से अधिक प्रतिभागी जंबूरी स्थल पर पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या 8 हजार से ऊपर जाने की संभावना है। इसके साथ ही करीब 500 विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग देने वाली है। आयोजकों का कहना है कि इतनी बड़ी विदेशी भागीदारी छत्तीसगढ़ में स्काउट-गाइड्स के इतिहास में पहली बार देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और विशाल पैमाने के कारण यह जंबूरी सिर्फ एक कैंप नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं के बीच नेतृत्व, अनुशासन और सेवा भावना को मजबूत करने का मंच बनती नजर आ रही है। संगठन का दावा है कि यह अब तक का छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा स्काउट-गाइड आयोजन साबित होगा, जहां देश-विदेश से आए कैडेट्स एक साथ सीखने और जुड़ने का अनुभव साझा करेंगे।
कुल मिलाकर, राजनीतिक शोर-शराबे के बीच जंबूरी की जमीनी तैयारियां पूरी हैं और दुधली गांव इन दिनों स्काउट-गाइड्स के उत्साह, अनुशासन और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का केंद्र बन चुका है।