अबूझमाड़ की धरती एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। बस्तर के घने जंगलों, पहाड़ियों और मावली माता की पावन भूमि के बीच आयोजित होने वाली अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन का पंचम संस्करण 31 जनवरी को होने जा रहा है। इस अवसर पर सर्किट हाउस में मंत्री Kedar Kashyap ने ‘अबूझमाड़ महोत्सव’ के अंतर्गत आयोजित इस प्रतिष्ठित मैराथन की आधिकारिक टी-शर्ट का विमोचन किया। यह आयोजन अब केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि बस्तर और अबूझमाड़ की बदली हुई तस्वीर का प्रतीक बन चुका है।
कभी नक्सल हिंसा, डर और अलगाव की पहचान रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में अब सुबह की शुरुआत बदली हुई है। जंगलों से उठती धुंध के बीच अब सिर्फ सन्नाटा नहीं, बल्कि दौड़ते कदमों की गूंज सुनाई देती है। गांव-गांव में मैराथन की तैयारी उत्सव का रूप ले चुकी है और स्थानीय लोग इसे गर्व के साथ अपना आयोजन मानने लगे हैं। यह मैराथन शांति, विकास और खेल भावना का वह संदेश है, जो अबूझमाड़ को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान दिला रहा है।
31 जनवरी को Narayanpur में होने वाली इस मैराथन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में धावकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों के अनुसार हर साल की तरह इस बार भी करीब 8 से 10 हजार एथलीट इस दौड़ में हिस्सा लेंगे। 15 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि वाली यह मैराथन अबूझमाड़ और आसपास के गांवों के युवाओं के लिए सपनों का नया रास्ता बन गई है, जहां वे अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने रख पा रहे हैं।
मंत्री केदार कश्यप ने इस मौके पर कहा कि अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि यह क्षेत्र में लौटती शांति, बढ़ते विश्वास और विकास की नई कहानी है। यह आयोजन दिखाता है कि बस्तर और अबूझमाड़ अब बदलाव की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। हर कदम के साथ अबूझमाड़ अपनी पहचान को नए अर्थ दे रहा है—डर से उम्मीद तक, सन्नाटे से उत्सव तक।